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छह साल पहले शिक्षक की हो चुकी है मौत, बिहार बोर्ड ने बना दिया परीक्षक

पटना : बिहार में इंटर का मूल्यांकन शुरू नहीं हुआ है. अगर शुरू हो जाता, तो पता चलता कि भूत भी इंटर का मूल्यांकन कर रहे हैं. जिस शिक्षक का निधन छह साल पहले हो गया, उसको बिहार बोर्ड ने परीक्षक बना दिया है. यह इस वर्ष ही नहीं, बल्कि हर वर्ष से होते आ रहा है.
शास्त्री नगर बालक उच्च विद्यालय के शिक्षक नरेश मेहता का निधन 2013 में हो गया. लेकिन, ये हर वर्ष इंटर के मूल्यांकन के परीक्षक बनते हैं. हर बार की तरह इस बार भी नरेश मेहता के नाम से परीक्षक का पत्र स्कूल को भेजा गया है.

स्कूल दे चुका है कई बार जानकारी
स्कूल की मानें, तो इसकी जानकारी हर साल मूल्यांकन के पहले बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को दी जाती है. लेकिन, हर बार समिति यह गलती करती है. 2014 से 2016 तक कई बार मैनुअल इसकी जानकारी समिति को दी गयी, लेकिन इस बार तो स्कूल ने ऑनलाइन जानकारी भी दी और मेल भी किया. इसके बाद भी समिति ने गलती की है अौर मरे हुए शिक्षक के नाम से एप्वाइंटमेंट लेटर निकाल दिया है.

स्कूल से हो गया ट्रांसफर, फिर भी बनाया जा रहा परीक्षक
बीएन कॉलेजिएट हाइस्कूल, पीएन एंग्लो हाइस्कूल, शास्त्री नगर हाइस्कूल आदि कई ऐसे हैं जहां के शिक्षकों का ट्रांसफर हो गया है और वे दूसरे स्कूलों में प्राचार्य है, लेकिन उन्हें शिक्षक के तौर पर परीक्षक बना कर नियुक्ति पत्र भेजा गया है. ऐसा ही एक उदाहरण द्वारिका हाइस्कूल की प्राचार्य नीलम कुमारी का है. नीलम कुमारी 2013 में शास्त्री नगर बालक उच्च विद्यालय में शिक्षिका थी. 2014 से वो द्वारिका हाइस्कूल में प्राचार्या है. लेकिन, उनके नाम से 2015, 2016 और अब इस बार 2017 में भी परीक्षक बनाये गये हैं.

सूची से नहीं हटाया नाम मैं 2014 से हर साल इसकी जानकारी समिति कार्यालय को देती हूं. इस बार ऑनलाइन व्यवस्था थी. इसमें जानकारी दी गयी है कि यह शिक्षक अब इस दुनिया में नहीं है. इनका नाम सूची से हटा दिया जाये. लेकिन, इसके बावजूद इस बार भी इनके नाम से नियुक्तिपत्र जारी कर दिया गया है. (अभय कुमार झा, प्राचार्य, शास्त्री नगर बालक उच्च विद्यालय)

जांच की जायेगी
इस बार ऑनलाइन शिक्षकों का डेटा तैयार किया गया था. इस तरह की गलती की मुझे जानकारी नहीं है. इस पर देखा जायेगा कि यह कैसे हुआ. इसकी जांच करवायी जायेगी. ऐसे शिक्षकों को हटा दिया जायेगा. स्कूलों को खुद हटाने के लिए कहा गया था. (आनंद किशोर, अध्यक्ष, बिहार बोर्ड)

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