जमुई। प्रखंड मुख्यालय में अवस्थित बीआरसी भवन, गिद्धौर में जिला शिक्षा
पदाधिकारी के आदेशानुसार आयोजित वेतन निर्धारण शिविर में शिक्षकों से पाच-पाच सौ
रुपये घूस लेने के कथित आरोप से विभागीय कार्यकलाप पर सवालिया निशान लगना शुरू हो
गया है। वेतन निर्धारण के नाम पर शिक्षकों का प्रखंड पदाधिकारियों द्वारा शोषण किया जाना
शिक्षा विभाग की छवि को धूमिल कर रहा है।
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वेतन निर्धारण के नाम पर उगाही
मधुबनी। वेतन निर्धारण हेतु सर्विस बुक जमा करने के एवज वरीय साधन सेवी पर लाखों
का अवैध उगाही करने का आरोप लगाते हुए प्रखंड के दर्जनों नियोजित शिक्षकों ने
शनिवार को बीआरसी अवस्थित उनके कमरे में तालाबन्दी कर बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक
शिक्षक संघ के प्रखंड अध्यक्ष जयप्रकाश की अध्यक्षता में प्रखंड संसाधन केन्द्र
प्रांगन में धरना पर बैठ गए।
शिक्षकों की कमी से पठन-पाठन प्रभावित
खगड़िया। विभागीय स्तर पर विद्यालयों में लगातार गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के दावे
किए जाते रहे हैं। परंतु गोगरी में सरकारी उदासीनता व अधिकारियों की लापरवाही के
कारण सरकारी विद्यालयों में बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
इसी का एक उदाहरण मध्य विद्यालय राटन भी है, जहा गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा में
शिक्षकों की कमी रोड़ा बना हुआ है।
डीईओ की फटकार बाद भी नहीं आया प्रतिवेदन
सहरसा। जहां जिले का शिक्षा विभाग प्रारंभिक विद्यालयों में कार्यरत नियोजित
शिक्षकों को पर्व से पूर्व नए वेतनमान देने के प्रयास में जुटा है। वहीं कई प्रखंड
के बीईओ इस कार्य में पलीता लगाने का कार्य कर रहे हैं। ताज्जुब तो यह है कि डीईओ
द्वारा बीईओ को इस मामले में कड़ी फटकार लगाए जाने के बावजूद शनिवार तक नवहट्टा,
सत्तरकटैया, महिषी सहित कई प्रखंडों के बीईओ ने नियोजित शिक्षकों के नए वेतनमान से
संबंधित कोई दस्तावेज जिला शिक्षा कार्यालय को उपलब्ध ही नहीं करवाया है।
बिहार चुनावः आधी आबादी ने उड़ाए दिग्गजों के होश
नवीन कुमार मिश्र, पटना। पहले और दूसरे चरण के
मतदान में महिलाओं की बढ़ी भागीदारी ने दिग्गज सियासतदांओं के होश उड़ा दिए हैं।
महिलाओं की मतदान के प्रति जागरूकता ने सियासी समीकरणों को गड़बड़ा दिया है। मतदान
के बाद अब सियासी पंडित ये गुणा-भाग करने में लगे हैं कि महिलाओं के वोट से किसे हो
रहा फायदा और किसे नुकसान।
मतदान का मोर्चा : डरा रही हैं महिलाएं
पटना [नवीन कुमार मिश्र]। महिलाओं यानी आधी आबादी का जिक्र छिड़ते ही अनायास
अबला की प्रतिमूर्ति उभरती है, मगर ये अबला महाबलियों को डरा रही हैं। महाबली वे जो
सत्ता पर काबिज हैं, सत्ता की दौड़ में हैं। वोटरों को घरों से निकाल कर बूथों तक
पहुंचाना राजनीतिक दलों के लिए चुनौती रही है, मगर महिलाएं जब बूथों पर पहुंचीं तो लोगों
का गणित गड़बड़ा रहा है। अब ये फोर्स हो गई हैं।
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