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प्राथमिक शिक्षकों के स्थानांतरण में अजब-गजब खेल

प्राथमिक शिक्षकों के स्थानांतरण में अजब-गजब खेल
गिरिडीह प्रतिनिधि  जिले में प्राथमिक शिक्षकों के स्थानांतरण के मामले में गिरिडीह में अजग-गजब खेल चल रहा है। जिला शिक्षा स्थापना समिति की बैठक में स्थानांतरण से संबंधित जो भी निर्णय लिए जाते हैं उसका आदेश जारी करने में शिक्षा विभाग को महीनों समय लग जाता है।
इससे शिक्षकों में भारी रोष है।बतला दें कि 29 सितंबर 2016 को आहुत जिला शिक्षा स्थापना समिति की बैठक में लगभग 50 प्राथमिक शिक्षकों के स्थानांतरण-पदस्थापन का निर्णय लिया गया था, जिसका आदेश जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा एक नहीं बल्कि कई पत्रों द्वारा अलग-अलग तिथियों में जारी किया जाता रहा। अब तक 05-06 पत्र निर्गत किया जा चुका है। इतना ही नहीं सूत्रों के अनुसार स्थापना की बैठक के ढ़ाई माह बीत जाने के बाद भी कुछ शिक्षकों के स्थानांतरण से संबंधित पत्र अब तक जारी नहीं किए गए हैं। सूत्र बताते हैं कि स्थानांतरित शिक्षकों द्वारा चढ़ावा चढ़ाए जाने के बाद ही पत्र निर्गत किया जाता है। एक ओर उपायुक्त उमाशंकर सिंह जहां जिले में शिक्षा का कलेवर बदलने में जुटे हैं वहीं दूसरी ओर विभाग में कई विसंगतियां व्याप्त हैं जो विकास के मार्ग में रोड़ा बन रही है। बताया जाता है कि 29 सितंबर को उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई जिला शिक्षा स्थापना समिति की बैठक में अतिरिक्त इकाई में कार्यरत 16, प्रशासनिक दृष्टिकोण से 03 एवं अभ्यावेदन पर विचारोपरांत कुल 31 शिक्षकों का स्थानांतरण हुआ था जबकि 02 नवनियुक्त शिक्षकों के पदस्थापन पर अंतिम मुहर लगी थी। क्या है प्रक्रियाप्राथमिक शिक्षकों के स्थानांतरण-पदस्थापन के लिए उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला शिक्षा स्थापना समिति की बैठक आहुत की जाती है। डीएसई द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाता है। इसके बाद निर्णय के आलोक में डीएसई आदेश जारी करते हैं। आदेश के मुताबिक स्थानांतरित शिक्षक नए विद्यालय में योगदान करते हैं। वर्जननई परंपरा शुरूआत करने जैसी कोई बात नहीं है। कई शिक्षकों के स्थानांतरण अभ्यावेदन में त्रुटि थी जिस कारण आदेश निकालने में विलंब हुआ या अलग-अलग आदेश निकाले गए हैं। स्थानांतरित शिक्षकों द्वारा चढ़ावा चढ़ाने के बाद ही स्थानांतरण आदेश निकाले जाने की बात बिल्कुल ही निराधार व असत्य है।कमला सिंह, जिला शिक्षा अधीक्षक, गिरिडीह

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