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3000 स्कूलों के लिए शिक्षकों के 37000 पद, काम कर रहे 12000

पटना|बिहार माध्यमिकशिक्षक संघ के सचिव शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा कि राज्य में 3000 माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय करीब 12 हजार शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। इनमें भी जीवविज्ञान और विज्ञान के करीब 500 शिक्षक ही हैं।
जबकि इन स्कूलों में करीब 37 हजार शिक्षक होने चाहिए। 2006 से लागू नियोजन नियमावली की गड़बड़ी के कारण करीब 25 हजार शिक्षकों के पद रिक्त हैं। बिना प्रधानाध्यापक के ढाई हजार विद्यालय चल रहे हैं। प्रधानाध्यापक के पद पिछले 10 वर्षों से रिक्त हैं। शिक्षक नहीं होने से 12वीं की पढ़ाई सब्जेक्ट वाइज नहीं हो पाती है। हर साल करीब 2 प्रतिशत शिक्षक रिटायर हो जाते हैं। उनकी जगह एक भी शिक्षक नहीं रखे जाते हैं। जारी विज्ञप्ति में उन्होंने सरकार से मांग है कि सभी रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियमित बहाली की जाए। बिहार की शिक्षा व्यवस्था सुधारनी है तो प्रधानाध्यापक के रिक्त पदों पर अविलंब ट्रेंड शिक्षकों को नियुक्त किया जाए। संघ ने सरकार से मांग की है कि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विद्यालय सेवा बोर्ड बनाया जाए। जिससे प्रधानाध्यापक और शिक्षकों की नियुक्ति कराई जा सके।

साइंस में असफल

{कुल: 4,49,279 विद्यार्थी

{हिंदी : 51,764 विद्यार्थी

{अंग्रेजी : 1,69,228 विद्यार्थी

{फिजिक्स : 1,18,002 विद्यार्थी

{केमेस्ट्री : 65,197 विद्यार्थी

{पेपर 5 : 34,155 विद्यार्थी

{पेपर 6 : 10,963 विद्यार्थी

कॉमर्समें असफल

{कुल: 15004 विद्यार्थी

{हिंदी : 5,573 विद्यार्थी

{अंग्रेजी : 5,421 विद्यार्थी

{एकाउंटेंसी : 2,496 विद्यार्थी

{बिजनेस स्टडीज : 1,079

{पेपर 5 : 393 विद्यार्थी

{पेपर 6 : 42 विद्यार्थी

^सीनियर शिक्षकों को ही प्रधानाध्यापक के रूप में विद्यालयों में बैठा दिया गया है। ऐसे शिक्षक प्रधानाध्यापक के रूप में काम नहीं कर सकते हैं। सरकार को प्रधानाध्यापक पद पर नए ट्रेंड शिक्षक को बैठाना चाहिए। सरकार ऐसा करती है तो शिक्षा व्यवस्था में सुधार सकता है। केदारनाथपांडेय, अध्यक्ष, बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ

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