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नीतीश कुमार के फैसले से चीख पड़ा बिहार का नियोजित शिक्षक




पटना (ब्यूरो)- केन्द्रीय वेतन आयोग मानवीय संवेदनाओं और जीवन यापन की चुनौतियों को मद्दे नजर रखते हुए एक सम्मान जनक वेतन की अनुशंसा करता है लेकिन आयोग की सिफारिशों को रौंदते हुए बिहार की इस बर्बर सरकार ने निरीह शिक्षकों का कमर तोड़ को दिया है|

शिक्षकों के इस करूण क्रंदन का जिम्मेदार जितना इस सूबे का मुखिया है उसके कहीं ज्यादा जिम्मेदार नियोजित शिक्षक संघ के केदार नाथ पांडेय,शत्रुघ्न प्रसाद सिंह, शिक्षक कोटि के एमएलसी जैसे दर्जनों शिक्षक नेता भी हैं| अगर ये सच है तो ईश्वर इनको दोज़ख बख्शे |
हमारे सभी संघों के नेता यह भलीभाँति जानते थे कि स्थिति यही होने वाली है लेकिन एक सोची समझी रणनीति के तहत ये लोग एक मंच पर नहीं आये, एक दूसरे को दोषी ठहराते रहे। यह कैसी विचार धारा, कैसा सिद्धान्त है?
इस कमर तोड़ महँगाई के दौर में जिन शिक्षकों का फैमिली बैकग्राउंड अच्छा न हो, ना पेंशन की उम्मीद, ना ससमय वेतन, बताइए उसका वर्तमान और भविष्य भयंकरमय नहीं है तो फिर क्या है ?
हम चुनाव में यथासंभव सरकार से निपट लेंगे लेकिन उससे पहले हमारे रक्षक बन कर बैठे इन भक्षक शिक्षक नेताओं से निपटना निहायत जरूरी हो गया है| हम समझते हैं कि ये हमारे मसीहा हैं लेकिन सच्चाई बिलकुल इसके उलट है| सरकार इनको जिम्मेदारी दी है कि शिक्षकों को वर्गों में बाँट कर उनपे नियंत्रण बनाये रखो ताकि शिक्षक अनियंत्रित न होने पाये |
साथियों इस समय हम शिक्षकों को कोई बड़ा उलट फेर तो करना ही होगा! यह वक़्त का तकाजा है |
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