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नीतीश राज में ठीक से लागू नहीं की गईं सरकारी योजनाएं, सीएजी की रिपोर्ट में खुली पोल

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में बिहार में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना को 183 गांवों में लागू नहीं किए जाने तथा समेकित बाल विकास योजना और राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम में खामी को दर्शाया गया है।
वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी द्वारा बिहार विधानसभा में सोमवार (27 मार्च) को पिछले वर्ष 31 मार्च को समाप्त हुए वर्ष के लिए पेश की गई कैग रिपोर्ट में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना (जिसके तहत 500 से 999 आबादी वाले गांवों को सड़क संपर्क उपलब्ध कराना था) के तहत 1,398.16 करोड़ रूपये खर्च किए जाने के बाद भी 183 गांवों में सड़क संपर्क उपलब्ध नहीं हो सका।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कई सड़कों का निर्माण कार्य अधूरा है, जबकि 78 प्रतिशत सड़कों के रखरखाव नहीं किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत ऐसे गांवों का भी चयन किया गया है, जिनका चयन पूर्व में ही प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत हो चुका है।

शिक्षा को लेकर कैग ने कहा है कि राज्य में 85 प्रतिशत उच्च माध्यमिक विद्यालयों में भवन की कमी है, जबकि शिक्षकों के पद रिक्त है। पुलिस आधुनिकीकरण को लेकर भी रिपोर्ट में कई तरह के सवाल खड़े किए गए हैं। दावा किया गया है कि राज्य में 53 प्रतिशत थानों को या तो अपना भवन नहीं है या उनके भवनों की हालत जर्जर है।

कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदेश में समेकित बाल विकास योजना सेवाएं मात्र 44 से 46 प्रतिशत बच्चों, 55 से 58 प्रतिशत गर्भवती अथवा स्तनपान कराने वाली माताओं तथा 10 से 20 प्रतिशत किशोरियों तक पहुंचाई गई।

योजना के तहत आने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों की चर्चा के दौरान कहा गया कि राज्य के 195 आंगनबाड़ी केंद्रों के भौतिक सत्यापन के दौरान 25 आंगनबाड़ी केंद्र बंद पाए गए जबकि 22 आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चे उपस्थित नहीं थे।

राज्य में 72 प्रतिशत कार्यशील आंगनबाड़ी केंद्र किराए के घरों अथवा पंचायत समुदायिक भवन अथवा खुले स्थानों पर संचालित पाए गए।

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