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क्या बिहार में शिक्षक होना शर्म की बात है .... ?

#क्या बिहार में शिक्षक होना शर्म की बात है .... ?
न्याय का ढोंग रचने वाली इस सुशासन की सरकार में भोजपुर जिले में जिला शिक्षा कार्यालय की उदासीनता ,शिथिलता, के कारण वेतन की राशि आवंटन के वावजूद होली जैसे पर्व में भी भोजपुर जिले के शिक्षको को 5 (पाँच) माह से बकाये वेतन के लिये संघर्ष करना पड़ रहा है ।

# ये भोजपुर जिले की ही शिक्षको की समस्या नही है कमोबेश पुरे बिहार की यही स्थिति है #
आप सभी आम जन , बुद्धिजीवि ,भाईयो- बहनों आप ही बताइये ये कैसा न्याय है जहां 80% गरीब, मजदूरों , किसानों ,समाज के वंचित, पिछडो के बच्चे बच्चियों को शिक्षा देने वाले ही आज भुखमरी की स्थिति में आ गए है , उनकी आर्थिक स्थिति चरमरा गई है, वे अपने घर परिवार को दैनिक जीवन की जरूरतों को पूरा करने में अस्मर्थ महसूस कर रहे है, पहले की उधारी के कारण वे खुद को नजरो से बचाये फिर रहे है, शिक्षक बेचारा निरीह प्राणी, इस होली जैसी मस्ती ,उमंगों भरी ये रंगों का त्यौहार बेरंग ही होगी शायद , क्योकि वे 5 माह से वेतन के आभाव में अपने बीवी,बच्चों के लिये नये नये कपडे की फरमाइस पूरी करे तो करे कैसे ?
# न्याय की सरकार का पिछला नारा था : झाँसे में न आएंगे नीतीश को जिताएंगे ! #
इस बार * सच्चा है, अच्छा है, चलो नितीश के साथ चले ! #
माननीय सुशासन बाबू हम तो आपके झांसे में आकर साथ तो चले थे , बदले में हमे क्या मिला उच्च न्यायलय से न्याय मिलने के बाद भी आपने अपने न्यायप्रियता एवम सुशासन का अच्छा परिचय दिया और हम शिक्षको को आर्थिक तंगी में भी सुप्रीम कोर्ट का चक्कर पे चक्कर लगवाया उनके साथ मिलकर जिन्होंने आपके विपक्ष में रहते हम शिक्षको से वादा किया था कि हम सरकार में आएंगे तो पूर्णवेतनमान देंगे ..., वैसे ही सच्चे इंसान को आपने उपमुख्यमंत्री / वित्तमंत्री बनाकर हम शिक्षको को 5-5 माह वेतन के बिना मानसिक,आर्थिक, सामाजिक तनाव में जीवन गुजारने पर मजबूर कर दिया ।
क्या यही आपकी सच्चाई है, अच्छाई है, और न्यायप्रियता ही...?

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