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पेट पालने को शिक्षक मजदूरी करने के लिए विवश

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से हुए लॉकडाउन के कारण विगत तीन माह से जिले के सभी स्कूल व कॉलेज बंद हैं। लेकिन सबसे ज्यादा मार निजी विद्यालय के शिक्षकों पर पड़ी है। स्कूल बंद होने के कारण अभिभावकों द्वारा निजी विद्यालयों से फीस माफ करने की आवाज उठ रही है।

वहीं अभिभावक भी विद्यालयों के फीस जमा करने में असमर्थता जता रहे हैं। जिससे कि छोटे निजी विद्यालय बंद होने के कगार पर हैं। वहीं इसमें पढ़ाने वाले शिक्षकों के सामने घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है। जिले के प्राईवेट स्कूल एडं चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष नूरैन खान बताते हैं कि जिले में गांव से लेकर शहरों तक लगभग 400 निजी विद्यालय एसोसिएशन से जुड़े हुए हैं। जिसमें से 25-30 विद्यालय अपना रूप रेंट भी नहीं दे पाने की स्थिति में हैं। वो कभी भी बंद हो सकते हैं। जबकि ज्यादातर विद्यालयों में जनवरी से ही छात्रों का फीस बकाया है। ऐसे में विद्यालय शिक्षकों को फीस नहीं दे पा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि निजी विद्यालयों के शिक्षा के अधिकार मद का बकाया राशि जिला शिक्षा विभाग के मांगने के लिए आवेदन दिया गया है। लेकिन अब तक कोई परिणाम नहीं निकला। वहीं स्वर्ण चंपा सहोदया संघ के सचिव बीरेंद्र प्रसाद मेहता ने बताया कि 19 निजी विद्यालय जुड़े हुए हैं। लेकिन लॉक डाउन के कारण सभी आर्थिक समस्या से जुझ रहे हैं। शिक्षकों को वेतन मिलना मुश्किल हो गया है। कई शिक्षक होम ट्युशन पढ़ा रहे हैं।

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