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विश्वविद्यालय शिक्षकों के वेतन कटौती का नहीं है कोई निर्देश

 सहरसा। शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा विश्वविद्यालय शिक्षकों के पच्चीस फीसद वेतन का कटौती किए जाने का कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है। इससे संबंधित जारी पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि गत 28 फरवरी, 2015 तक जिन विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने वेतन सत्यापन के लिए आवेदन वेतन सत्यापन कोषांग में नहीं जमा कराया है, उनके वेतन मद की राशि से 25 फीसद राशि की कटौती की जाए।

विश्वविद्यालय सीनेट सदस्य डॉ विपिन कुमार सिंह और डॉ अरविद कुमार ने इस बाबत जारी बयान में कहा है कि राज्य सरकार द्वारा जारी परिपत्र में उद्धृत स्पष्ट निर्देश के बावजूद यह भ्रांति फैलाई जा रही है कि सभी शिक्षकों के मासिक वेतन में एकमुश्त पच्चीस राशि की कटौती का आदेश शिक्षा विभाग द्वारा दिया गया है, यह बात पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यों से परे है।

जारी बयान में सीनेट के सदस्यों ने इस बात पर भी आश्चर्य प्रकट किया है कि कुछ एक शिक्षक संघ से जुड़े पदाधिकारी भी बिहार सरकार से आए परिपत्र को गलत तरीके से उल्लेखित करने का कार्य कर रहे हैं। कहा है कि विश्वविद्यालय को शिक्षकों के वेतन निर्धारण का पूर्ण अधिकार है तथा शिक्षकों की प्रोन्नति एवं पीएचडी धारी शिक्षकों का वेतनमान एवं वेतन वृद्धि यूजीसी अनुशंसा एवं राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली स्वीकृति के उपरांत ही होता है तथा बीएनएमयू द्वारा भी शिक्षकों की प्रोन्नति, वेतनमान में वृद्धि तय मानकों के अनुसार ही की गई है. जाहिर तौर पर इस पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगाया जा सकता.

जहां तक 28 फरवरी, 2015 तक जिन शिक्षकों के द्वारा आवेदन वेतन सत्यापन कोषांग में जमा नहीं किया गया है, वैसे शिक्षकों का भी वेतन कटौती नहीं की जा सकती, क्योंकि इसके बाबत जारी न्यायादेश में यह स्पष्ट किया जा चुका है कि वेतन सत्यापन कोषांग महज आपत्ति प्रकट कर सकती है तथा इसे आधार बनाकर किसी के वेतन में कटौती नहीं की जा सकती है। बयान में यह तथ्य भी उद्धृत किया गया है कि वेतन सत्यापन प्राप्त करना शिक्षकों की जवाबदेही नहीं है तथा एक विहित प्रक्रिया के तहत विश्वविद्यालय को ही इस जिम्मेदारी का निर्वाह करना होता है। 

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