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सीबीएसई में बोर्ड प्रणाली में हस्तक्षेप से इनकार

सीबीएसई में बोर्ड परीक्षा प्रणाली लागू करने पर पटना हाइकोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने सीबीएसई नीति पर हस्तक्षेप नहीं करने की बात कह पूरा मुद्दा सीबीएसई के समक्ष रखने की खुली छूट दी है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन तथा न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ ने अवधेश कुमार की लोकहित याचिका पर सुनवाई की।
आवेदक के वकील प्रशांत सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि सीबीएसई ने सर्वे कर तथा छात्रों की मनोदिशा का अध्ययन कर बोर्ड परीक्षा की जगह 2009 में ग्रेडिंग सिस्टम लागू की थी। परीक्षा में अच्छे नंबर नहीं लाने तथा परीक्षा के डर से कई छात्रों ने खुदकुशी कर ली थी।
इसके मद्देनजर ग्रेडिंग सिस्टम लागू की थी, लेकिन सीबीएसई ने 31 जनवरी को अधिसूचना जारी कर सत्र 2017-18 से बोर्ड परीक्षा लागू करने का आदेश दिया है।
छात्र-शिक्षक अनुपात का पालन न होने पर मांगा जवाब
छात्र-शिक्षक अनुपात का पालन नहीं किए जाने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब-तलब किया है। अदालत ने सरकार को चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन तथा न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ ने सर्वहारक विकास मंच की लोकहित याचिका पर सुनवाई की।

अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2009 में अधिसूचना जारी कर छात्र-शिक्षक अनुपात व मानक तय किया था, लेकिन इसका पालन आज तक नहीं किया गया। वर्ग एक से पांच तक के छात्रों के लिए 60 छात्र पर दो शिक्षक रखने का प्रावधान है। इस वर्ग में 150 से ज्यादा छात्र होने की स्थिति में एक हेडमास्टर सहित पांच शिक्षक रखने का प्रावधान है। वहीं वर्ग 6 से 8 में 35 बच्चों पर एक शिक्षक रखना है। इसके अलावा सायंस, सोशल सायंस, भाषा विषय के लिए कम से कम एक शिक्षक रखना है, लेकिन इस अनुपात का पालन नहीं किया जा रहा है। 

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