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वेतनमान को ले सरकार कर रही धोखाधड़ी

मधेपुरा | नगर संवाददाता राज्य सरकार सूबे के चार लाख प्रारंभिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक नियोजित शिक्षक और पुस्तकालयध्यक्ष को सातवें वेतन के नाम पर धोखाधड़ी कर रही है। ये बातें बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार पप्पू ने कही।
उन्होंने कहा कि नियोजित शिक्षकों और पुस्तकालयध्यक्ष को जुलाई 2015 से ही वेतनमान दिया गया। सेवाशर्त निर्धारण के लिए उच्चस्तरीय कमेटी भी बनायी गयी, लेकिन समय पर सेवाशर्त लागू नहीं की गयी। केन्द्र सरकार की तर्ज पर राज्य सरकार ने सातवें वेतनमान के निर्धारण के लिए कमेटी बनायी। लेकिन वेतन कमेटी के सामने सरकार ने नियोजित शिक्षकों को सातवें वेतन का लाभ देने के लिए कोई दिशा-निर्देश नहीं दिया। कमेटी ने नियोजित शिक्षा कर्मियों को अलग रखकर वेतन निर्धारण की प्रक्रिया अपनायी, जो अनुचित है।

प्रदेश अध्यक्ष श्री पप्पू ने कहा कि राज्य सरकार की नियत और नीति पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नियोजित शिक्षक सातवें वेतन और समान काम का समान वेतन पाने के लिये आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। श्री पप्पू ने कहा कि सरकार की शिक्षा और शिक्षक विरोधी नीति को संघ कामयाब नहीं होने देगा। उन्होंने कहा कि 13 जनवरी को सभी नियोजित शिक्षक सातवें वेतन, पूर्ण वेतनमान और राज्यकर्मियों की सुविधा के लिए सभी जिला मुख्यालय पर आक्रोशपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेंगे।

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