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बिहार में अब बच्चे स्कूल नहीं आए तो मास्टर साहेब की खैर नहीं

राज्य ब्यूरो, पटना : प्रारंभिक स्कूलों के हेडमास्टर, मास्टर साहब अब स्कूल से गायब रहने वाले बच्चों को स्कूल वापस लाने के लिए उनके घर तक जाएंगे। इसके बाद भी यदि स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति 75 प्रतिशत नहीं होगी और जांच में यह बात सामने आएगी तो प्रिंसिपल और शिक्षक के वेतन में कटौती की जाएगी।

कटौती पचास फीसद से अधिक नहीं होगी। राज्य सरकार ने प्रारंभिक स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति का अनुपात बढ़ाने के इरादे से यह फैसला किया। गुरुवार को यह आदेश जारी कर दिया गया।
सामाजिक कार्य समिति को मॉनीटरिंग का जिम्मा
हाल ही में मुख्यमंत्री ने जीविका के ग्राम संगठन की सामाजिक कार्य समिति के माध्यम से स्कूलों की मॉनीटङ्क्षरग का निर्देश शिक्षा विभाग को दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा था सरकार छह से चौदह वर्ष के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा दे रही है। इसके लिए आवश्यक है कि सामाजिक सहभागिता को बढ़ाया जाए। इसी क्रम में जीविका को मॉनीटरिंग का काम सौंपा गया।
महीने में दो बार करना होगा विद्यालय का निरीक्षण
आज जारी आदेश में स्पष्ट है कि सामाजिक कार्य समिति के सदस्य प्रत्येक महीने कम से कम दो बार स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। सदस्य निरीक्षण के दौरान पाते हैं कि शिक्षक स्कूल से नदारद हैं तो उपस्थिति रजिस्टर में इसे दर्ज करेंगे। उपस्थिति रजिस्टर के आधार पर बीईओ शिक्षक से स्पष्टीकरण लेंगे और वेतन काटने की अनुशंसा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी से करेंगे।
तो कटेगा प्रिंसिपल और शिक्षक का वेतन
निरीक्षण के दौरान यदि स्कूल बंद पाया जाता है तो इसके लिए प्रिंसिपल को दोषी माना जाएगा और उनके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। छात्रों की उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम है तो शिक्षक और प्रिंसिपल की मदद लेकर स्कूल से गायब बच्चों को स्कूल तक लाएंगे। लगातार तीन निरीक्षण में यदि ऐसी ही स्थिति पाई जाती है तो संबंधित स्कूल के हेडमास्टर और शिक्षक के वेतन में कटौती होगी।
सामाजिक कार्य समिति करेगी छह बिन्दुओं की जांच
- स्कूल का समय पर खुलना और बंद होना
- कार्यरत शिक्षकों की उपस्थिति
- छात्रों का नामांकन और उपस्थिति
- विद्यालय में नियमित पढ़ाई
- साफ-सफाई और शौचालय का प्रयोग

- मध्याह्न भोजन योजना की स्थिति
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