Random-Post

पूर्व प्रभारी कुलपति के कार्यकाल में व्यापक धांधली

भागलपुर। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के पूर्व प्रभारी कुलपति डॉ. नीलाबुज वर्मा के कार्यकाल में व्यापक धांधली बरती गई है। इसकी जांच राजभवन द्वारा गठित कमेटी ने पूरी कर ली है। कमेटी ने राजभवन को रिपोर्ट सौंपी है या नहीं इसकी पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है।
हालांकि कमेटी को 19 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट राजभवन को सौंपना था। विवि सूत्रों का कहना है कि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट राजभवन को सौंप दी है, वहीं कमेटी की प्रमुख पूर्व कुलपति डॉ. प्रेमा झा के करीबी लोगों का कहना है कि रिपोर्ट मंगलवार को सौंपी जाएगी।
सूत्रों ने बताया कि पूर्व प्रभारी कुलपति डॉ. वर्मा के कार्यकाल में 34 ऐसे शिक्षकों को प्रोन्नति दी गई, जिनकी सेवा स्थायी नहीं थी। राजभवन द्वारा गठित कमेटी की जाच में यह मामला सामने आया। जो शिक्षक रिकोमेंडेड टू (आर टू) श्रेणी में हैं, उन्हें प्रोन्नति दे दी गई। जबकि इन शिक्षकों की सेवा स्थायी नहीं थी। चतुर्थ चरण में अंगीभूत हुए कॉलेजों के वैसे शिक्षक जो जस्टिस अग्रवाल कमीशन की रिपार्ट में सृजित या रिकोमेंडेड वन श्रेणी में नहीं है, उनकी सेवा को स्थायी नहीं माना गया था। ऐसे शिक्षकों को रिकोमेंडेड टू श्रेणी में रखा गया था। इस श्रेणी में वैसे शिक्षक शामिल हैं, जिनके पद का प्रस्ताव तय समय सीमा 30 अप्रैल 1986 तक सरकार को नहीं भेजा गया था। जांच कमेटी की हेड डॉ. प्रेमा झा भी 2006 से 2009 के बीच तिमांभाविवि की कुलपति रह चुकी हैं, इनके कार्यकाल में भी फोर्थ फेज कॉलेजों के शिक्षकों की सेवा व वेतन का मामला उठता रहा था। इनके पूर्व के कुलपतियों के समय भी अक्सर ऐसा मामला आता रहा है। पूर्व कुलपतियों ने सरकार के निर्देश पर कई बार रिकोमेंडेड टू श्रेणी के शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन रोका था। ऐसे में जाच कमेटी के सामने रिकोमेंडेड टू श्रेणी के शिक्षकों को प्रोन्नति देने का मामला गलता पाया गया है।
डॉ. वर्मा के कार्यकाल में एक कंप्यूटर एजेंसी को बिना टेंडर के ही रिजल्ट तैयार करने का ठेका दे दिया गया था। कमेटी की जाच में यह गड़बड़ी भी सामने आई है। जाच कमेटी ने रिजल्ट, एजेंसी को किए गए भुगतान का लेखा-जोखा देखने के बाद टेंडर की जानकारी मागी तो बताया गया कि टेंडर हुआ ही नहीं था। बताया गया कि 2013 में बिना टेंडर के ही एजेंसी को काम देने के बाद दर भी तय नहीं किया गया था। उस समय एक रिजल्ट तैयार करने में 12 रुपये खर्च आते थे, लेकिन एजेंसी को 17 से 22 रुपये के हिसाब से भुगतान दिखाया गया है। वर्मा के कार्यकाल में कापी की खरीद में गडबड़ी का मामला भी जाच कमेटी ने पकड़ा है। विवि में दो करोड़ की कापिया होने के बावजूद एक करोड़ रुपये की और कापिया खरीद ली गई थीं। पहले की दो करोड़ की कॉपिया डॉ. वर्मा से पहले के कुलपति डॉ. विमल कुमार और अंजनी कुमार सिन्हा के कार्यकाल में मुजफ्फरपुर व पटना से खरीदी गई थीं। इन कॉपियों का उपयोग नहीं हो पाया था, क्योंकि खरीद के कुछ ही दिन के बाद डॉ. विमल कुमार की जगह डॉ. अरुण कुमार कुलपति बनाए गए थे, जो 20 दिन ही इस पद पर रहे थे। इसके बाद कुलपति बने डॉ. अंजनी सिन्हा भी करीब एक महीने ही इस पद पर रहे थे।
अभियंताओं की नियुक्ति व प्राचार्य का तबादला का मामला भी जाच के दौरान सामने आया है। डॉ. वर्मा के समय कुछ अभियंताओं की भी नियुक्ति हुई थी। पहले इन्हें काट्रैक्ट पर बहाल किया गया और बाद में स्थायी कर दिया गया था। इन्हें अलग-अलग कॉलेजों में नियुक्त किया गया था। एसएम कॉलेज की तत्कालीन प्राचार्य डॉ. निशा राय का एमएएम कॉलेज नवगछिया में तबादला भी डॉ. वर्मा के कार्यकाल में हुआ था। डॉ. निशा राय अभी मारवाड़ी कॉलेज की प्राचार्य हैं। विवि प्रशासनिक भवन और पीजी विभागों के 12 कर्मचारियों का स्थानातरण भी किया गया था।
इसके अलावा 117 अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति भी हुई थी। हालाकि, इनमें भी अपनी तरह की एक और गड़बड़ी बताई जा रही है कि रिकार्ड में 117 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति है, लेकिन हकीकत में 138 को नियुक्त किया गया था। डॉ. वर्मा के समय काट्रैक्ट वाले 17 कर्मचारियों की सेवा नियमित की गई थी। ये कर्मचारी टीएनबी कॉलेज, मारवाड़ी कॉलेज, विवि प्रशासनिक भवन, स्वास्थ्य केन्द्र और पीजी विभागों में कार्यरत हैं। कुछ कॉलेजों को उनके समय तीन साल का संबंधन भी मिला था।

19 दिसंबर को कुलाधिपति को अपनी रिपोर्ट सौंपने जा रही कमेटी जाच के लिए विवि द्वारा उपलब्ध कराई गई फाइलों में सबसे पहले हस्ताक्षर देख रही है। पहली पड़ताल यही होती है कि किस तिथि को डॉ. वर्मा का हस्ताक्षर हुआ था। 28 अप्रैल 2013 से छह फरवरी 2014 के बीच की तिथि देखते ही कमेटी उस निर्णय को गलत करार दे रही है।

Recent Articles