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बिहारशरीफ के नालंदा कॉलेज में सोमवार को नैक (नेशनल एसोसिएट एंड एक्रेडिशन काउन्सिल) पीयर टीम ने कई विभागों का गहन निरीक्षण शुरु किया। मौजूदा स्थिति को कलमबद्ध भी किया।
क्लास रुम में जाकर छात्रों से भी रूबरू हुए। मौके पर छात्र-छात्राओं से कई सवाल भी पूछे। हालांकि निरीक्षण के दौरान वहां मौजूद अधिकारियों से भी जानकारियां लीं।
नैक पीयर की टीम सोमवार को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर नालंदा कॉलेज पहुंची। सबसे पहले प्रधानाचार्य डॉ. डीके सिंह ने कालेज से संबंधित पूरी जानकारी टीम को पीपीटी के माध्यम से आधे घंटे का प्रेजेंटेशन दिया। इसके बाद स्मार्ट क्लास में वहां के प्रोफेसर व विभागाध्यक्षों के साथ दो घंटे 20 मिनट की लंबी बातचीत हुई। वहां के अधिकारियों से जानकारियां इकट्ठी कर नैक टीम के सदस्य हर बात को गोपनीय तरीके से कलमबद्ध करते रहे। नैक टीम को कॉलेज का परिभ्रमण पूर्व प्राचार्य डॉ. हरिद्वार सिंह, पूर्व प्रभारी प्राचार्य प्रो. सच्चिदानंद सिंह ने कराया। इस दौरान टीम के साथ मगघ विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. नवीन श्रीवास्तव और कालेज के निरीक्षण कॉर्डिनेटर प्रो. स्वर्ण प्रभात भी मौजूद थे। कॉलेज की व्यवस्था व विभाग को देखकर नैक पीयर टीम काफी संतुष्ट दिखी। मौके पर नालंदा कॉलेज शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. वीर अभिमन्यु सिंह ने भी सहयोग दिया।
बच्चों से जाना शिक्षा का स्तर
एक बजकर 20 मिनट पर स्मार्ट क्लास से निकलते ही टीम ने भौतिकी विभाग का निरीक्षण किया। लगभग 10 मिनट की पूछताछ के बाद जुलोजी विभाग में शिक्षकों व विभागाध्यक्ष से बात की। इसके बाद बॉटनी विभाग में सबसे अधिक 25 मिनट तक क्लास रुम, लैब व बच्चों के साथ समय बिताया। वहां पढ़ रही छात्राओं से बायोटेक्नोलोजी से संबंधित भी कई सवाल पूछे। यहां तक कि एक छात्र से नैक सदस्य ने डू यू स्मोक (क्या तुम धुम्रपान करते हो) भी पूछ डाला। इस पर नो सर का जवाब मिलते ही ओके कह नैक टीम आगे बढ़ गयी। निरीक्षण 20 दिसम्बर को दूसरे दिन भी जारी रहेगा।
जांच दल में ये थे शामिल
वासुदेव वर्मन- कोलकाता
मायाशंकर सिंह- बीएचयू
नरेंद्र कुमार गर्ग- रोहतक, हरियाणा
नालंदा कॉलेज जिला का पहला कॉलेज
ब्रिटिश काल में ही वर्ष 1870 में नालंदा कॉलेज बना। उस वक्त बिहार, उड़ीसा व बंगाल एक साथ थे। उस समय कोलकाता विश्वविद्यालय में यह कॉलेज रहा। बिहार व उड़ीसा के अलग होते ही यह पटना विश्वविद्यालय व उसके बाद बिहार विश्वविद्यालय में भी रहा। 1962 में मगध विश्वविद्यालय बनते ही यह यहां की अंगीभूत इकाई बना। अभी भी सबसे अधिक विषयों की पढ़ाई यहां उपलब्ध है। जिले में सबसे अधिक छह हजार विद्यार्थी इस कॉलेज में अध्ययनरत हैं। हालाकि कालेज को नैक से मान्यता प्राप्त नही हो सका है।
कालेज में इन विषयों की हो रही पढ़ाई
अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र, फिलॉस्फी, हिंदी, अंग्रेजी, भौतिकी, रसायन, बॉटनी, जुलोजी, गणित, पाली, संस्कृत, उर्दू, इतिहास, भूगोल, मनोविज्ञान के अलावा बीसीए, एमबीए, एमसीए, टीटीएम, बीबीएम व बायोटेक।

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