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माननीय शिक्षा मंत्री श्री अशोक चौधरी जी से विनम्र आग्रह...

अशोक जी, आज ही आपको टीवी चैनल पर कहते सुना कि "बाप दादा के नाम पर स्कूल-कॉलेज खोलकर डिग्री बेचने वाले सावधान हो जाएँ"! अशोक चौधरी जी आप तो विद्वान् आदमी हैं !! आपको ग़रीबों और बंचितों की रहनुमाई करने का मौका मिला है, आप इनकी रहनुमाई करना भी चाहते हैं।
बस एक आग्रह करता हूँ आपसे कि इतिहास उठाकर देख लें कि अगर बिहार के लोग अपने बाप- दादा के नाम से स्कूल कॉलेज नहीं खोलते तो बिहार में कितने स्कूल और कॉलेज होते ?? अशोक जी आपको तो सब पता है कि डिग्री बेचने वाले बाप- दादा के नाम पर स्कूल-कॉलेज खोलने वाले नहीं बल्कि लालकेश्वर हैं जिनको आप और आपकी सरकार ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था के इतने महत्वपूर्ण पड़ाव को इनके हाथ में दे दिया जिनके कर्मों से आज अपना बिहार पुरे देश के सामने शर्मशार है जिसका परिणाम यह है कि बिहार के नौनिहालों को आज दूसरे राज्य में सर को झुकाना पड़ रहा है।

मंत्री जी से मेरा यह कहना है कि बाप-दादा के नाम पर स्कूल-कॉलेज खोलने वाले समाज के रहनुमा हर कोई बच्चा राय नहीं होता, ये बच्चा राय जैसे लोग तो आपके और आपकी सरकार के सिस्टम की उपज हैं जिसने हमारे सर को देश के आगे झुकाया है। बेवजह बाप-दादा के नाम पर स्कूल-कॉलेज खोलनेवाले सदियों से चले आ रहे समाज के रहनुमा के प्रति आपका इतना नकारात्मक रवैया शोभा नहीं देता। यही लोग वो रहनुमा है जो सदियों से शिक्षा के क्षेत्र में बिहार का नाम रौशन होने में 70 से 80 प्रतिशत तक अपना योगदान समाज को दिया। लेकिन आपकी व्यवस्था ने इस स्कूलों और कॉलेजों को शिक्षक भी नहीं दे पाये। इसलिए मेरा कहना है कि मंत्री जी, आपको अपनी व्यवस्था में सुधार लाने की जरुरत है न कि उन समाज की रहनुमाई करने वालों पर भड़कने की। ये आप भी जानते हैं कि शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों ऐसी चीजें है जो बिना समाज के सहयोग के सिर्फ सरकारी व्यवस्था से संभव नहीं हो सकता है।
इतिहास गवाह है कि बिहार में शिक्षा गाँव के दालानों से शुरू हुई बाद में मकान में जगह मिला, लेकिन दुःख तो इस बात की है कि अब ये दलालों के पास चली गयी है। तो मेरा यह आग्रह होगा कि दालान से निकली हुई शिक्षा को दलालों के चंगुल से मुक्त कराना चाहेंगे, इसी की जरुरत है !!

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