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आखिरकार फूट गया टॉपर गणेश का भंडा

खुलासा. 31 मई के अंक में सबसे पहले 'प्रभात खबर' ने उठायी थी उंगली 
समस्तीपुर : तमाम प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद इस साल भी इंटर में टॉपर घोटाला हो ही गया. इस बार टॉपर घोटाले का यह जिन्न समस्तीपुर में निकला. इंटर परीक्षा परिणाम घोषित होने के तीन दिनों तक आर्ट्स टॉपर को लेकर उठ रहे सवालों को दबाने के प्रयासों के बीच अंतत : शुक्रवार को यह साबित हो गया कि शिक्षा माफियाओं की जड़ कितनी मजबूत है.
 इतनी सख्ती के बावजूद इन्होंने इसमें सेंध लगाकर इसे जता भी दिया. बात कर रहे हैं इंटर आर्ट्स के टॉपर गणेश कुमार की. गणेश कुमार के संगीत विषय के ज्ञान को लेकर प्रभात खबर पहले ही सवाल उठाया था. उसके उम्र को लेकर भी संदेह लोगों को हो रहा था. 
 
शुक्रवार को इस बात की पुष्टि हो गयी कि गणेश ने उम्र छिपाने के लिये दोबारा परीक्षा दी. इस बात की पुष्टि होने के प्राथमिकी दर्ज करने के तुरंत बाद पटना में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गणेश का वास्तविक उम्र 42 वर्ष है. पहले भी वह झारखंड के गिरिडीह से मैट्रिक  की परीक्षा वर्ष 1990 में पास कर चुका है. अधिक उम्र होने के कारण नौकरी पाने के लिये उसने ये सारा तिकड़म रचा लेकिन टॉपर होने के कारण उसकी पोल खुल गयी. बता दें कि बाद में मैट्रिक में जो उसका जन्म तिथि अंकित हैं उसके मुताबिक उसकी उम्र 24 वर्ष है. 
 
सवालों के घेरे में आये इंटर कला के टॉपर गणेश कुमार संजय गांधी उच्च विद्यालय लक्षमीनियां से दसवीं कक्षा पास किया है. उसका नामांकन नवमी कक्षा में नामांकन अभिभावक प्रमाण पत्र के आधार पर हुआ था. रोसड़ा थाना के हरिपुर गांव के  राम नारायण सिंह के पुत्र संजय कुमार ने अभिभावक प्रमाण पत्र देकर उसका नामांकन कराया था. अब मामले का खुलासा होने के बाद जांच की जद उनतक भी पहंुचेगी. बताया जाता है कि नौवीं कक्षा में 9 मई 13 को उसका एडमिशन लिया गया था. एडमिशन रजिस्टर में उसका नाम 303 पर दर्ज है. अभिभावक प्रमाण पत्र में संजय कुमार ने कहा है कि स्व. शंकरनाथ राम का पुत्र गणेश कुमार उनके सानिध्य में रह रहकर पढाई की है. स्कूल में गणेश का मोबाइल नंबर या स्थायी पता नहीं रहने के कारण मुख्यमंत्री प्रोत्साहन मद की राशि का चेक अबतक विद्यालय में ही पड़ा हुआ है.अब मामले का खुलासा होने के बाद स्कूल की संबद्धता भी बोर्ड ने रद करने का मन बना लिया है.
 
रोजगार की खोज में समस्तीपुर आया था गणेश
 
मूलरूप से झारखंड प्रांत के गिरिडीह जिला अंतर्गत सरिया का रहने वाले गणेश का कहना है कि पिता शंकरनाथ राम की मौत के बाद घर की जिम्मेदारी उसके कंधे पर आ गयी. इसके कारण उसे बीच में ही अपनी पढ़ाई रोकनी पड़ी थी. दो बहनों की शादी की. परंतु एक बहन का ससुराल में तालमेल नहीं बैठा जिसके कारण मां के साथ उसकी जवाबदेही भी उसने अपने उपर ही उठा रखी है.
 
रोजी रोटी की तलाश में भटकता हुआ वह वर्ष 12 में समस्तीपुर पहुंचा. यहां अखबार बेचकर दिन गुजारने लगा. इस सबके बीच भी उसमें पढ़ाई का जुनून कम नहीं हुई. समस्तीपुर में अखबार बेचते हुए उसने संजय गांधी उच्च विद्यालय लक्षमिनिया शिवाजीनगर से मैट्रिक की परीक्षा पास कर ली. राम नन्दन सिंह जगदीप नारायण उच्च माध्यमिक इंटर कालेज चकहबीव के प्रचार पोस्टर को देखकर उसने यहां नामांकन करा लिया. गणेश की मानें तो रिजल्ट निकलने से पूर्व ही वह अपने चाचा की मौत की खबर पर मुर्शीदाबाद चला गया. लौटने के क्रम में अखबार से ही उसे टापर होने की जानकारी मिली तो वह सीधे कालेज पहुंचा. 
 
सुर-ताल का ज्ञान नहीं मिल गया था 83 अंक 
 
समस्तीपुर इंटर आर्ट्स के स्टेट टापर गणेश कुमार की प्रतिभा को लेकर पिछले तीन दिनों से लगायी जा रही अटकलों पर उस वक्त मुहर लग गया थ जब गुरुवार को कालेज परिसर में उससे पूछे जा रहे सवालों का सटीक जबाव ढूंढने के लिए उसे इधर उधर झांकना पड़ा. हिन्दी के बाद सबसे अधिक 83 अंक प्राप्त करने वाले विषय संगीत के बारे में पूछे जाने पर पता चला कि उसे सुर और ताल का मुकम्मल ज्ञान नहीं है. आखिर उसे 83 अंक कैसे मिले यह सवालों के घेरे में है. कालेज प्रभारी प्राचार्य अरुणेंद्र कुमार के पास ही खुद से इस बात का खुलासा किया कि कालेज में संगीत विषय के कोई स्थायी शिक्षक नहीं हैं. 
 
पहले एक महिला शिक्षिका थीं. बाद में उनके चले पर कालेज प्रशासन कभी कभार संगीत के किसी शिक्षक को बुलाकर शिक्षा दिलाते थे. 
 
संबंधित संस्थान की मान्यता रद्द करे बोर्ड 
 
शिक्षाविद् प्रो. दशरथ तिवारी ने कहा कि बोर्ड पहले संबंधित विद्यालय की संबद्धता को रद्द करे. साथ ही परीक्षा व्यवस्था को दुरु स्त करने की कवायद शुरू करे. सही सही जांच हो तो गणेश जैसे दर्जनों परीक्षार्थी सामने आयेंगे जो प्रैक्टिकल के मार्क्स पर उत्तीर्ण है. बोर्ड को चाहिए कि वह गहराई से इसकी छानबीन करे.
 
पहले ही करनी चाहिए थी कार्रवाई 
 
शिक्षाविद् प्रो. एससी झा का कहना है कि बोर्ड को यह कारवाई पहले ही करनी चाहिए थी. खैर देर से ही सही गणेश का परीक्षा परिणाम रद्द कर उचित कार्रवाई की है. ऐसे कारवाई से उन छात्रों के बीच भी संदेश जाएगा जो शिक्षा माफिया से मिलकर मेधावी छात्रों को ठेस पहुंचाते है.
 
प्रभारी प्राचार्य का सामान्य ज्ञान भी आ चुका है सामने
 
सैकड़ों किलोमीटर दूर गिरिडीह जिला के सरिया से पढाई के लिये समस्तीपुर पहुंचा गणेश कुमार उस इंटर कॉलेज से पढाई की जिसमें बिना खिड़की दरवाजे के कमरे हैं. महज कुछ वर्ष पहले ही इस कॉलेज को बिहार बोर्ड से मान्यता मिली है. 18 शिक्षकों वाले इस क ालेज में आठ कमरे उपलब्ध हैं.
 
इसी में लाइब्रेरी, लैब, कार्यालय कक्ष शामिल हैं. भले अभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होनी इस कालेज के पास बाकी है, लेकिन शैक्षणिक परिणाम उन कालेज को सीख दे रहा है जिनके पास पहले से सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं. जिनके बच्चे शायद ही कभी स्टेट स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया हो.स्टेट टापर गणेश का विषय गृहविज्ञान, म्यूजिक, मनोविज्ञान, हिंदी व एनआरबी व अंग्रेजी है. कॉलेज के छात्र गणेश के साथ प्रभारी प्राचार्य के सामान्य ज्ञान की कलई भी खुल चुकी है. वहीं जानकारों का बताना है कि देर सवेर इस प्रकरण की गाज इस कॉलेज पर भी गिरना तय है और इसकी संबद्धता भी रद हो सकती है. 
 
वर्ष 13 में मिली काॅलेज को स्वीकृति
 
समस्तीपुर के तत्कालीन डीइओ जयचंद श्रीवास्तव के कार्यकाल में इस कालेज को बिहार बोर्ड से मान्यता मिली थी. उस वक्त काॅलेज चेयरमैन प्रो. राजमणि सिंह हुआ करते थे. कालेज की वर्तमान व्यवस्था देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि चार वर्ष पहले इसकी क्या स्थिति रही होगी और किन परिस्थितियों में जिला शिक्षा पदाधिकारी से लेकर बोर्ड के अधिकारियों ने इस कालेज को स्वीकृति प्रदान की होगी. 

सबसे अधिक अंक हिंदी में स्टेट टापर गणेश कुमार को हिंदी में सर्वाधिक 92 अंक मिले हैं. साहित्य से जुड़े लोग इस मार्किंग से हैरान हैं कि भाषा साहित्य में किसी छात्र को इतना अंक कैसे आ सकता है. इसी तरह संगीत में 83, एनआरए व एमएल में 78  एचआइएस में 80, समाज अध्ययन 80 व मनोविज्ञान में 59 अंक हैं. 

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