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फर्जी शिक्षकों को फिर सताने लगा निगरानी का भूत

रोहतास। चार वर्ष पूर्व राजपुर प्रखंड में गलत तरीके से नियोजित किए गए शिक्षकों की नियोजन प्रक्रिया की जांच का जिम्मा दुबारा निगरानी को सौंपे जाने से एक बार फिर फर्जी शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। वहीं नियोजन इकाई व शिक्षा विभाग के अधिकारियों में भी बेचैनी बढ़ गई है।

जितेंद्र कुमार द्वारा दायर याचिका पर कोर्ट ने विजिलेंस को जांच कर तय समय में रिपोर्ट सौंपने के दिए गए आदेश के बाद नियोजन इकाई व नियोजित शिक्षकों को विजिलेंस का भूत सताने लगा है। बताते चलें कि अपीलीय प्राधिकार के आदेश पर आनन फानन में इकाई ने जून 2012 में 33 प्रखंड शिक्षकों का नियोजन किया था। जिसे जदयू नेता अमरेश चौधरी ने डीइओ के यहां चुनौती दी थी। तत्कालीन डीईओ ओमप्रकाश शुक्ल ने जांच में नियोजन प्रक्रिया को नियम व निर्देश को ताक पर रख पूरी करने की बात सही पाई थी। जांच रिपोर्ट के आलोक में डीईओ ने डीएम व विभागीय निदेशक को पत्र भेज इकाई व नियोजित शिक्षकों पर कानूनी कार्रवाई हेतु मार्गदर्शन मांगा था। जिसके बाद मार्च 2013 में प्राथमिक शिक्षा निदेशक व डीएम के निर्देश पर विभाग ने इकाई समेत सभी नियोजित 33 शिक्षकों पर राजपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बावजूद फर्जी इन शिक्षकों को नहीं हटाए जाने पर जितेंद्र कुमार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी । जिसमें कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के आलोक में निगरानी की एक सदस्यीय टीम ने जांच की।
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