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बिहार में 20 हजार पद खाली, नहीं मिल रहे हैं प्लसटू शिक्षक

राज्य के उच्च माध्यमिक (प्लसटू) विद्यालयों में शिक्षकों के 20 हजार पद खाली हैं। इन पदों पर पांच राउंड में चले नियोजन अभियान के बाद भी राज्य सरकार को शिक्षक नहीं मिले। इसका व्यापक असर प्लसटू स्कूलों के पठन-पाठन पर पड़ रहा है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान की बैठक में राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति के सामने शिक्षा विभाग ने इस समस्या का खुलासा किया।

गौरतलब है कि राज्य में बड़ी संख्या में माध्यमिक विद्यालयों का उच्च माध्यमिक में उत्क्रमण हुआ है। तीन साल पहले उच्च माध्यमिक शिक्षकों के करीब 67 हजार पद भी सृजित किए गए। इन सृजित पदों पर नियुक्ति के लिए एसटीईटी हुआ था। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से लिए गए पहले एसटीईटी में 10 हजार से अधिक अप्रशिक्षित भी उत्तीर्ण हो गए, लेकिन नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन की सख्त हिदायत की वजह से उन्हें नियुक्त नहीं किया जा सका।

शिक्षा विभाग को गणित, साइंस और अंग्रेजी जैसे विषयों में खोजने पर भी एसटीईटी उत्तीर्ण प्रशिक्षित शिक्षक नहीं मिले और प्लसटू शिक्षकों के 20 हजार पद खाली रह गए। इसके समाधान के लिए विभाग ने विशेष टीईटी के आयोजन का निर्णय लिया है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति नौवीं की वार्षिक परीक्षा के बाद इसका आयोजन करेगा।

पीजी के बाद बीएड को प्रोत्साहित करें विश्वविद्यालय
शिक्षा मंत्री डॉ. अशोक चौधरी ने सभी कुलपतियों से कहा है कि वे पीजी करने वाले विद्यार्थियों को बीएड करने के लिए प्रोत्साहित करें।

जीईआर बढ़ाने को चले विशेष अभियान
शिक्षा विभाग ने कुलपतियों से कहा है कि निजी तकनीकी कॉलेजों की तर्ज पर प्रदेश में उच्चशिक्षा में ग्रास इनरॉलमेंट रेशियो (जीईआर) बढ़ाने का अभियान चले। इंटरमीडिएट का रिजल्ट आने वाला है। रिजल्ट प्रकाशन के बाद विश्वविद्यालय उच्च माध्यमिक स्कूलों में नामांकन कैम्प लगाकर विद्यार्थियों को स्नातक कक्षा में दाखिला लें।

प्रदेश में मौजूदा स्थिति यह है कि इंटर पास करने वाले आधे विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। इस मामले में जहां नेशनल एवरेज 23 फीसदी है वहीं बिहार का औसर 12.9 है। बिहार ने इसे 30 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।


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