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निगरानी की जांच में खुल रहे चौंकानेवाले राज : बिहार शिक्षक नियोजन Latest Updates


गोपालगंज : शिक्षा विभाग में सक्रिय माफियाओं ने टीइटी का फर्जी परीक्षाफल तैयार कर उसके अनुरूप पंचायतों में नियोजन भी करा लिया. निगरानी की जांच में कई चौंकानेवाली बातें सामने आयी हैं. 
फर्जी टीइटी को आधार बना कर शिक्षकों का नियोजन करा लिया गया. अब जांच में मामला खुलने लगा है. पंचदेवरी के बीइओ अरविंद कुमार ने नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, इंद्रपट्टी में कार्यरत शिक्षक शैलेंद्र कुमार चौबे तथा मंगहा-मुजहा में कार्यरत वंदना राय का तत्काल प्रभाव से चयन रद्द करने का आदेश दिया है. दोनों शिक्षकों के नियोजन के लिए शिक्षा विभाग के एक बाबू ने दबाव बनाया था.
जांच में निगरानी ने पाया कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सचिव की तरफ से 23.01.2014 के पत्रंक बीएसइबी-पीए 4862/14 से एक फर्जी पत्र बना कर जिला शिक्षा पदाधिकारी, गोपालगंज को भेजा गया, जिसमें 29 अभ्यर्थियों के रिजल्ट को जारी किया गया था. उस पत्र के आलोक में विभाग के बाबुओं ने पंचायत नियोजन इकाइयों को भेज कर नियोजन कराने में सफलता हासिल कर ली.
विभाग ने रिजल्ट को बताया था फर्जी
वर्ष 2011 में प्रमाणपत्र के आधार पर नियोजन का लाभ लेने की सूची को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सचिव ने फर्जी करार दिया था. विभाग के पत्रंक के 454 दिनांक 20.06.2014 में स्पष्ट किया गया है कि 77 ऐसे टीइटी की सूची फर्जी बना कर गोपालगंज के डीइओ को भेजी गयी, जिसमें तत्कालीन सचिव ललन झा का हस्ताक्षर था. हस्ताक्षर की जांच में पाया गया वह पूरी तरह से गलत था. ललन झा का तबादला जून, 2013 में ही हो चुका था, जबकि पत्र 2014 में जारी किया गया था.
डीएम के आदेश के बाद भी हुआ नियोजन
डीएम कृष्ण मोहन ने अपने पत्रंक 13/24 सी दिनांक 29.06.2014 में  सभी नियोजन इकाइयों को निर्देश दिया कि विभाग के द्वारा स्पष्ट किया गया है कि बड़े पैमाने पर फर्जी टीइटी प्रमाणपत्र विभाग परीक्षा समिति के सचिव के जाली हस्ताक्षर से जारी किया गया है. उसकी जांच करने के बाद ही नियोजन करेंगे.
फर्जी टीइटी पर काम कर रहे शिक्षकों को हाइकोर्ट के आदेश पर मौका दिया गया था कि वे अपने पद से इस्तीफा दे दें. वह अवधि बीत गयी है. अब फर्जी प्रमाणपत्र पर काम करनेवाले शिक्षकों पर कार्रवाई शुरू हो गयी है. फर्जीवाड़े में शामिल विभाग के अधिकारी हो या बाबू उन पर भी निगरानी की नजर है.                                                                      
सुनील कुमार, डीडीसी


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