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दस्तावेज जुटाने में नियोजन इकाईयों के छूट रहे पसीने : बिहार शिक्षक नियोजन Latest Updates

कैमूर : नियोजित शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच के लिए उनके नियोजन से संबंधित दस्तावेज जुटाने में यहां नियोजन इकाईयों के पसीने छूट रहे है। ग्राम पंचायत नियोजन इकाईयों की स्थिति ज्यादा खराब है, जिनके लिए शिक्षकों के नियोजन के वक्त का कागजात जुटाना टेढ़ी खीर साबित हो रही है। समस्या की जटिलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हाईकोर्ट द्वारा जांच का आदेश देने के एक माह बीतने के बाद भी स्थानीय प्रखंड की पंद्रह पंचायतों की नियोजन इकाईयों में से किसी ने अभी तक नियोजन से संबंधित संपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया है। 
प्रखंड की मेउड़ा व पच पोखरी पंचायतों को छोड़ कर अन्य पंचायतों की नियोजन इकाईयों ने आंशिक रूप से भी नियोजन से संबंधित दस्तावेज निगरानी जांच के लिए प्रस्तुत नहीं किये है। विदित हो कि वर्ष 2003 से अब तक कई बार शिक्षकों के नियोजन हो चुके है। नियोजन इकाईयों को सबसे अधिक परेशानी वर्ष 2003 के नियोजन के दस्तावेज जुटाने में ही हो रही है। पंचायतों में नियोजित कई शिक्षकों के आवेदन पत्र तक नहीं मिल रहे है। विदित हो कि पंचायत की नियोजन इकाई के अध्यक्ष प्रखंड प्रमुख और सचिव बीडीओ होते है। भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि प्रखंड नियोजन इकाई के दस्तावेज सुरक्षित तरीके से रखे हुए है। लेकिन पंचायत नियोजन इकाईयों के दस्तावेजों के रख रखाव में काफी लापरवाही व कोताही बरती गई है। इसके चलते ग्राम पंचायत मुख्यालयों में पंचायत संसाधन केन्द्र होने के बावजूद कई पंचायतों में शिक्षकों के नियोजन के कागजात वहां मौजूद नहीं है। सकरी, बहेरा आदि कुछ पंचायतों में तो पूर्ववर्ती पंचायत सचिवों ने अपने बाद वाले सचिवों के कायदे से प्रभार तक नहीं दिया है। अब जब निगरानी जांच की तलवार लटक रही है तो नियोजन से संबंधित कागजातों की तलाश में पूर्ववर्ती पंचायत सचिवों व मुखियों से संपर्क साधा जा रहा है। पंचायत संसाधन केन्द्रों में धूल फांक रहे जिन बंडलों व फाइलों की ओर कोई नजर तक नहीं उठता था वे भी खंगाले जा रहे है। नियोजन से संबंधित कुछ फर्जी दस्तावेजों को जान बूझकर नष्ट कर दिये जाने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। शिक्षकों के नियोजन के वक्त प्रखंड के कई पंचायतों में धांधली बरते जाने की बातें काफी चर्चा में रही है। धांधली में शामिल रहे लोग गड़बड़ियों को छुपाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते है। विदित हो कि निगरानी विभाग द्वारा प्रमाण पत्रों की जांच हाईकोर्ट के आदेश पर हो रही है। मामले को लेकर दाखिल की गई एक याचिका की सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट गत 17 मई को ही जांच का आदेश दे चुका है। निगरानी विभाग ने हर जिले की तरह कैमूर जिले के लिए भी जांच टीम गठित की है, जिसके सदस्य संबंधित जगहों का दौरा कर काम को अंजाम दे रहे है। 
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