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जमुई में इंटरमीडिएट छात्रों की परेशानी, परीक्षा नजदीक लेकिन सिलेबस अधूरा

 बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा नजदीक है, लेकिन जमुई जिले के कई छात्र गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं। परीक्षा से पहले जहां छात्र अंतिम तैयारी में जुटे होते हैं, वहीं यहां सिलेबस पूरा न होने से छात्रों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

परीक्षा से पहले अधूरी पढ़ाई बनी चिंता का कारण

जमुई के मलयपुर स्थित प्लस टू हाई स्कूल में पढ़ने वाले इंटरमीडिएट के करीब 240 छात्र परीक्षा के मुहाने पर खड़े हैं, लेकिन कई विषयों की पढ़ाई अब तक पूरी नहीं हो सकी है। छात्रों का कहना है कि पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान नियमित कक्षाएं नहीं हो पाईं, जिससे वे परीक्षा की तैयारी नहीं कर पाए।

शिक्षक की कमी से बिगड़ी व्यवस्था

विद्यालय में लंबे समय से विषय शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। गणित, अंग्रेजी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। मजबूरी में अन्य कक्षाओं के शिक्षकों से पढ़ाई कराई जा रही है, लेकिन इससे सिलेबस पूरा नहीं हो पा रहा है।

छात्रों में बढ़ता तनाव

परीक्षा नजदीक आते ही छात्रों में तनाव और भय का माहौल है। आर्थिक रूप से कमजोर छात्र ट्यूशन का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं, जबकि कुछ छात्र निजी कोचिंग का सहारा लेकर सिलेबस पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि यदि समय पर सिलेबस पूरा नहीं हुआ तो परीक्षा परिणाम पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

अभिभावकों की चिंता

अभिभावकों का भी कहना है कि बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ता नजर आ रहा है। वे शिक्षा विभाग से जल्द से जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं, ताकि छात्रों को परीक्षा से पहले पर्याप्त मार्गदर्शन मिल सके।

स्कूल प्रशासन का पक्ष

विद्यालय प्रशासन ने शिक्षक कमी की बात स्वीकार की है और बताया है कि इस समस्या की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी जा चुकी है। हालांकि अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

यह मामला सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो इसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ सकता है।

निष्कर्ष

इंटरमीडिएट छात्रों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है। सिलेबस अधूरा रहना न सिर्फ परीक्षा परिणाम को प्रभावित करेगा, बल्कि छात्रों के आत्मविश्वास को भी कमजोर करेगा। जरूरत है कि शिक्षा विभाग तुरंत हस्तक्षेप करे और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करे।

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