; paras[X - 1].parentNode.insertBefore(ad1, paras[X]); } if (paras.length > X + 4) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 3].parentNode.insertBefore(ad2, paras[X + 4]); } if (isMobile && paras.length > X + 8) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 7].parentNode.insertBefore(ad3, paras[X + 8]); } });

Big Breaking News - UPTET

Advertisement

बेगूसराय में नियोजित शिक्षकों की बैठक, पांचवीं सक्षमता परीक्षा के बहिष्कार का लिया गया निर्णय

 बिहार के बेगूसराय जिले में नियोजित शिक्षकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें शिक्षकों ने पांचवीं सक्षमता परीक्षा के बहिष्कार का सर्वसम्मति से निर्णय लिया। यह बैठक बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में नियोजित शिक्षक शामिल हुए।

बैठक कहां और किस उद्देश्य से हुई?

यह बैठक बखरी प्रखंड संसाधन केंद्र (BRC) परिसर में आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य नियोजित शिक्षकों की समस्याओं पर चर्चा करना और सक्षमता परीक्षा को लेकर आगे की रणनीति तय करना था।

पांचवीं सक्षमता परीक्षा का बहिष्कार क्यों?

बैठक में मौजूद शिक्षकों ने कहा कि:

  • बार-बार सक्षमता परीक्षा लेना शिक्षकों पर अनावश्यक मानसिक दबाव डालता है

  • वर्षों से कार्यरत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है

  • परीक्षा के नाम पर शिक्षकों का उत्पीड़न किया जा रहा है

इन्हीं कारणों से शिक्षकों ने पांचवीं सक्षमता परीक्षा का सामूहिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया।

शिक्षक संगठनों की भूमिका

शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक सरकार शिक्षकों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सभी नियोजित शिक्षकों से एकजुट रहने और बहिष्कार को सफल बनाने की अपील की।

बैठक में रखी गई प्रमुख मांगें

  • सक्षमता परीक्षा को पूरी तरह समाप्त किया जाए

  • नियोजित शिक्षकों को स्थायी शिक्षक का दर्जा दिया जाए

  • सेवा शर्तों में सुधार किया जाए

  • शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा की जाए

आंदोलन को मिल रहा समर्थन

इस निर्णय के बाद बेगूसराय सहित आसपास के क्षेत्रों में भी शिक्षकों के बीच आंदोलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई अन्य जिलों के शिक्षक संगठनों ने भी इस फैसले का समर्थन करने के संकेत दिए हैं।

निष्कर्ष

बेगूसराय में नियोजित शिक्षकों की बैठक और सक्षमता परीक्षा के बहिष्कार का निर्णय यह दर्शाता है कि शिक्षक अब अपने अधिकारों को लेकर संगठित और मुखर हो रहे हैं। आने वाले दिनों में यदि सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच संवाद नहीं होता है, तो यह आंदोलन और तेज हो सकता है।

UPTET news