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रामरतन उच्च विद्यालय में शिक्षकों की कमी से हो रही परेशानी

अरवल। एक वर्ष के अंदर तीन आईआईटीयन को पैदा करने वाला प्रखंड क्षेत्र का रामरतन उच्च विद्यालय संसाधनों का दंश झेल रहा है। यहां कभी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा छात्र-छात्राओं को बेहतर तरीके से उपलब्ध होता था। यहां के विद्यालय की शिक्षा और अनुशासन की चर्चा दूर - दूर तक थी।
लेकिन हुआ यूं कि शिक्षक सेवानिवृत होते चले गए और उनके जगह पर नए शिक्षक पदस्थापित नहीं किए गए। परिणामस्वरूप विद्यालय में शिक्षकों का टोटा हो गया है। माध्यमिक कक्षाओं में हिन्दी और संस्कृत जैसे महत्वपूर्ण विषय की शिक्षक की पदस्थापना नहीं है। विज्ञान विषय के शिक्षक भी दो वर्षों से छुट्टी पर हैं। ऐसे में इन विषयों को दूसरे विषय के शिक्षक पढ़ा रहे हैं। जिसके कारण यहां के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल रही है। विद्यालय के माध्यमिक कक्षाओं में 1050 बच्चों का नामांकन है। वहीं विद्यालय में इंटर का शैक्षणिक कार्य पूरी तरह बदहाल है। इसमें मात्र दो शिक्षक ही कार्यरत हैं। इंटर में नामांकित दो सौ बच्चे विद्यालय से सिर्फ फॉर्म और पंजीयन तक ही मतलब रखते हैं। अपने विषय की तैयारी के लिए वे लोग को¨चग व ट्यूशन पर निर्भर हैं। व्यवस्था की बदहाली का आलम यह है कि सरकार की हाईटेक व्यवस्था अब तक इस विद्यालय में नहीं पहुंचा है। यहां कम्प्यूटर विषय के शिक्षक उपलब्ध नहीं है जिसके कारण इस विषय की पढ़ाई नहीं होती है। विद्यालय में पुस्तकालय के नाम पर किताब तो जरूर उपलब्ध है लेकिन पुस्ताकालाध्यक्ष का पद रिक्त रहने के कारण इसका भी नियमित संचालन नहीं हो रहा है। यहां विभाग ने पर्याप्त खेल सामग्री तो उपलब्ध करा दी है। लेकिन इसके लिए कोई विशेषज्ञ शिक्षक पदस्थापित नहीं है। सामाजिक विज्ञान के शिक्षक डॉ. शैलेश कुमार अपने विषय के जिम्मेदारी के साथ पुस्तकालय और खेल का भी काम देखते है। इस विद्यालय का भवन काफी जर्जर अवस्था है। 1981 में स्थापित इस विद्यालय के भवन नियमित देखभाल के अभाव में जर्जर हो रहा है। कमरे की कमी भी शिक्षा की गुणवता को प्रभावित कर रही है।
सुने छात्र-छात्राओं की:
कम्प्यूटर की पढ़ाई से हमलोग वंचित हैं। इस विषय के शिक्षक उपलब्ध नहीं है। पुस्तकालय से पुस्तकें तो मिलती है लेकिन अध्यक्ष नहीं रहने से परेशानी हो रही है।
पीयूष कुमार
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हिन्दी और संस्कृत विषय के साथ-साथ विज्ञान की पढ़ाई भी बाधित है। कभी-कभी दूसरे विषय के शिक्षक इन विषयों को पढ़ाते जरूर हैं लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
विवेकानंद कुमार
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कमरे की कमी के कारण परेशानी हो रही है। हमलोगों के लिए कोई अलग कॉमन रूम की व्यवस्था नहीं है।
सलोनी कुमारी
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खेल के शिक्षक नहीं रहने के कारण विद्यालय स्तर पर आयोजित खेलकूद प्रतियोगिता का नियमित तैयारी नहीं हो पाता है। जिससे हमलोगों को अन्य स्कूल के बच्चों की तरह अपना जौहर दिखाने का मौका नहीं मिल पाता है।
मानसी कुमारी
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सुने प्रभारी की:
संसाधनों की कमी है। भवन की स्थिति भी ठीक नहीं है। कई विषय के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। फिर भी हमलोग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में पूरे मन से जुटे रहते हैं। हमारा प्रयास रहता है कि यहां के बच्चे बेहतर शिक्षा हासिल कर इलाके का नाम रौशन करें। समस्याओं से विभाग को अवगत करा दिया गया है।

अर¨वद शर्मा

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