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बिहार शिक्षा परियोजना की रिपोर्ट : राज्य में प्राथमिक शिक्षा का सच सामने आया

राहुल पराशर |पटना स्कूलहै। स्कूल का नाम है। बच्चों का एडमिशन भी हुआ। लेकिन, शिक्षक नहीं हैं। बिना शिक्षक वाले स्कूलों में बच्चों को किसने पढ़ाया? इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।
शिक्षक-छात्र अनुपात को नियंत्रित करने का दावा करने वाले शिक्षा विभाग को बीईपी ने इस सच से सामना कराया है।
प्राथमिक शिक्षा की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जा सके हैं। शिक्षा विभाग ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को जो पांच से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की रिपोर्ट दी है, उसके अनुसार जनसंख्या का 28 फीसदी यानी करीब 2.89 करोड़ इसके अंतर्गत हैं। राज्य में 2015-16 में प्राथमिक स्कूलों में 2.34 करोड़ बच्चों के एडमिशन का दावा किया गया। 4,67,877 शिक्षकों की नियुक्ति की सूचना सरकार ने केंद्र को दी है। इसमें नियोजित शिक्षकों को भी शामिल किया गया है। प्राथमिक स्कूल (कक्षा 1 से 5) में 30 बच्चों पर एक शिक्षक और उच्च प्राथमिक स्कूल (कक्षा 6 से 8) ें 35 बच्चों पर एक शिक्षक का मापदंड निर्धारित है। इस आधार पर राज्य के प्राथमिक स्कूलों में 7,46,479 शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए। इस हिसाब से प्राथमिक स्कूलों में 2,78,602 शिक्षकों की कमी है

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