जमुई। नियोजित शिक्षकों के टीईटी प्रमाण पत्र की जांच एक बार फिर कराई
जाएगी। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने यह निर्णय लिया है। डीईओ सुरेन्द्र कुमार
सिन्हा के इस निर्णय से पूर्व में किए गए सभी जांच संदेह के दायरे में आ
गया है।
नियोजन प्रक्रिया से लेकर अब तक छह बार नियोजित शिक्षकों के टीईटी सहित सभी प्रमाण पत्रों की जांच की जा चुकी है। हाईकोर्ट के आदेश पर फिलवक्त निगरानी द्वारा जांच की जा रही है। ऐसे में डीईओ द्वारा स्थानीय स्तर पर एक बार फिर टीईटी प्रमाण पत्र की जांच कराने का निर्णय कई सवालों को जन्म दे रहा है। शिक्षक संघ ने जांच के औचित्य पर सवाल उठाते हुए नाराजगी व्यक्त की है।
पूर्व की जांच पर नहीं हुई कार्रवाई
नियोजन से लेकर वेतन भुगतान तक नियोजित शिक्षकों के टीईटी सहित सभी प्रमाण-पत्रों की जांच छह बार हो चुकी है। पूर्व के जिला शिक्षा पदाधिकारी बीएन झा ने भी दो बार जिला स्तर पर शिक्षकों के टीईटी प्रमाण-पत्रों का मिलान कराया। पहली जांच में ढाई सौ शिक्षकों के टीईटी प्रमाण-पत्र स्कैनिंग पाए गए। दूसरी बार की जांच में उन्हें सही करार दे दिया गया। इसके अलावा तकरीबन सौ के करीब नियोजित शिक्षकों के टीईटी व प्रमाण-पत्र पर फर्जी होने का मुहर विभाग द्वारा लगाया गया था। जागरण ने एक प्रमाण-पत्र पर दो-दो शिक्षिकाओं के कार्यरत होने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया जिसमें उन शिक्षक-शिक्षिकाओं के नाम भी उजागर किए गए थे। बावजूद चिन्हित फर्जी टीईटी पर कार्यरत शिक्षकों के विरुद्ध वर्तमान जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में एक बार फिर जांच कराने के निर्णय को शिक्षक पूर्व में खेले गए खेल को दुहराने की कवायद के समान मान रहे हैं।
नियोजित शिक्षकों की संख्या
पंचायत व प्रखंड शिक्षक- 6495
उच्चतर माध्यमिक- 201
माध्यमिक- 347
त्याग-पत्र देने वाले शिक्षक- 141
-----------------
नियोजन नियमावली के मुताबिक डीईओ प्रमाण-पत्रों की जांच कराने के लिए सक्षम पदाधिकारी हैं।
- अमित कुमार, प्रवक्ता, शिक्षा विभाग, पटना।
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जिनके प्रमाण-पत्र का सत्यापन हो चुका है उन्हें जांच के नाम पर परेशान करना नियम के विरुद्ध है। इस मामले में संघ की बैठक बुलाई गई है। डीईओ की मनमानी के खिलाफ रणनीति तय की जाएगी।
- आनंद कौशल सिंह, प्रदेश सचिव, शिक्षक संघ।
नियोजन प्रक्रिया से लेकर अब तक छह बार नियोजित शिक्षकों के टीईटी सहित सभी प्रमाण पत्रों की जांच की जा चुकी है। हाईकोर्ट के आदेश पर फिलवक्त निगरानी द्वारा जांच की जा रही है। ऐसे में डीईओ द्वारा स्थानीय स्तर पर एक बार फिर टीईटी प्रमाण पत्र की जांच कराने का निर्णय कई सवालों को जन्म दे रहा है। शिक्षक संघ ने जांच के औचित्य पर सवाल उठाते हुए नाराजगी व्यक्त की है।
पूर्व की जांच पर नहीं हुई कार्रवाई
नियोजन से लेकर वेतन भुगतान तक नियोजित शिक्षकों के टीईटी सहित सभी प्रमाण-पत्रों की जांच छह बार हो चुकी है। पूर्व के जिला शिक्षा पदाधिकारी बीएन झा ने भी दो बार जिला स्तर पर शिक्षकों के टीईटी प्रमाण-पत्रों का मिलान कराया। पहली जांच में ढाई सौ शिक्षकों के टीईटी प्रमाण-पत्र स्कैनिंग पाए गए। दूसरी बार की जांच में उन्हें सही करार दे दिया गया। इसके अलावा तकरीबन सौ के करीब नियोजित शिक्षकों के टीईटी व प्रमाण-पत्र पर फर्जी होने का मुहर विभाग द्वारा लगाया गया था। जागरण ने एक प्रमाण-पत्र पर दो-दो शिक्षिकाओं के कार्यरत होने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया जिसमें उन शिक्षक-शिक्षिकाओं के नाम भी उजागर किए गए थे। बावजूद चिन्हित फर्जी टीईटी पर कार्यरत शिक्षकों के विरुद्ध वर्तमान जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में एक बार फिर जांच कराने के निर्णय को शिक्षक पूर्व में खेले गए खेल को दुहराने की कवायद के समान मान रहे हैं।
नियोजित शिक्षकों की संख्या
पंचायत व प्रखंड शिक्षक- 6495
उच्चतर माध्यमिक- 201
माध्यमिक- 347
त्याग-पत्र देने वाले शिक्षक- 141
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नियोजन नियमावली के मुताबिक डीईओ प्रमाण-पत्रों की जांच कराने के लिए सक्षम पदाधिकारी हैं।
- अमित कुमार, प्रवक्ता, शिक्षा विभाग, पटना।
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जिनके प्रमाण-पत्र का सत्यापन हो चुका है उन्हें जांच के नाम पर परेशान करना नियम के विरुद्ध है। इस मामले में संघ की बैठक बुलाई गई है। डीईओ की मनमानी के खिलाफ रणनीति तय की जाएगी।
- आनंद कौशल सिंह, प्रदेश सचिव, शिक्षक संघ।