भागलपुर आरडीडीई का पद भरने के बाद भी दफ्तर सूना है। बांका के डीपीओ,
डीईओ के बाद आरडीडीई के प्रभार में आए शास्वतानंद झा सिर्फ एक बार ही दफ्तर
आए हैं। आरडीडीई कार्यालय में अधिकारी नहीं आने से यहां के सारे काम लंबित
हैं।
आरडीडीई भागलपुर कार्यालय करीब एक साल से सूना पड़ा है। शास्वतानंद झा एक दिसंबर से आरडीडीई के प्रभार में है। तब से वह आठ दिसंबर को शाम में कार्यालय आए थे। उसके बाद उनके दफ्तर में ताला ही लगा है।
इससे पहले बांका के ही डीपीओ व डीईओ अब्दुल मोकिद को दो महीने का प्रभार मिला था। लेकिन उस दौरान वह एक से दो बार ही कार्यालय आए। कार्यालय कर्मचारियों को ही बांका जाकर फाइलों पर उनके हस्ताक्षर करवाने पड़ते थे। उनके बाद फिर बांका के डीपीओ एसएसए झा को तिहरा प्रभार मिल गया है। इसलिए आरडीडीई के रहने और न रहने का कोई अंतर नहीं है।
बिहार प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष शेखर गुप्ता ने कहा कि आरडीडीई के कार्यालय नहीं आने से शिक्षकों के काम नहीं हो रहे हैं। शिक्षकों का अपीलीय प्राधिकार आरडीडीई कार्यालय ही होता है। इसलिए वहां अधिकारी नहीं रहने से प्रोन्नति का मामला भी अटका हुआ है। प्राथमिक शिक्षक संघ गोप गुट के जिला सचिव श्यामनंदन सिंह बताया कि प्रोन्नति की अपील पर सुनवाई नहीं हो रही है। हमलोगों ने क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक से अपील की है वह दो दिन कार्यालय में बैठें। बिहार प्रारंभिक शिक्षक संध के प्रदेश अध्यक्ष पूरण कुमार ने कहा कि शिक्षक हित काम बंद हो गया है। बीईओ मनमानी कर रहे हैं उन्हें देखने वाला कोई नहीं है। आरीडीईई जब तक नहीं बैठेंगे शिक्षक प्रताड़ित होते रहेंगे।
65 शिक्षकों की प्रोन्नति अटकी
आरडीडीई के नहीं रहने से जिले में 65 शिक्षकों की प्रोन्नति अटकी हुई है। इन शिक्षकों ने आरडीडीई कार्यालय में सितंबर में प्रोन्नति के लिए अपील की थी। आरडीडीई के नहीं रहने से उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसके अलावा सेवांत लाभ, शिक्षक नियोजन, सूचना के अधिकार और स्कूल निरीक्षण के जरूरी काम नहीं हो रहे हैं। इसके अलावा पटना निदेशालय से प्राप्त निर्देश के पालन होने में दिक्कत हो रही है। रोज शिक्षा विभाग से जाने वाली फाइलों पर आरडीडीई के हस्ताक्षर नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा अभी शिक्षक सामंजन में भी आरडीडीई को संज्ञान लेना है जो कि नहीं हो पा रहा है।
पहले भार फिर प्रभार: आरडीडीई
प्रभारी आरडीडीई शाश्वतानंद झा ने कहा कि उनके पास बांका एसएसए और डीईओ का प्रभार है। इसके बाद ही आरडीडीई का प्रभार है। पहले भार को निपटाना जरूरी है। हफ्ते में एक दिन भागलपुर में बैठने का समय निकालेंगे।
आरडीडीई भागलपुर कार्यालय करीब एक साल से सूना पड़ा है। शास्वतानंद झा एक दिसंबर से आरडीडीई के प्रभार में है। तब से वह आठ दिसंबर को शाम में कार्यालय आए थे। उसके बाद उनके दफ्तर में ताला ही लगा है।
इससे पहले बांका के ही डीपीओ व डीईओ अब्दुल मोकिद को दो महीने का प्रभार मिला था। लेकिन उस दौरान वह एक से दो बार ही कार्यालय आए। कार्यालय कर्मचारियों को ही बांका जाकर फाइलों पर उनके हस्ताक्षर करवाने पड़ते थे। उनके बाद फिर बांका के डीपीओ एसएसए झा को तिहरा प्रभार मिल गया है। इसलिए आरडीडीई के रहने और न रहने का कोई अंतर नहीं है।
बिहार प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष शेखर गुप्ता ने कहा कि आरडीडीई के कार्यालय नहीं आने से शिक्षकों के काम नहीं हो रहे हैं। शिक्षकों का अपीलीय प्राधिकार आरडीडीई कार्यालय ही होता है। इसलिए वहां अधिकारी नहीं रहने से प्रोन्नति का मामला भी अटका हुआ है। प्राथमिक शिक्षक संघ गोप गुट के जिला सचिव श्यामनंदन सिंह बताया कि प्रोन्नति की अपील पर सुनवाई नहीं हो रही है। हमलोगों ने क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक से अपील की है वह दो दिन कार्यालय में बैठें। बिहार प्रारंभिक शिक्षक संध के प्रदेश अध्यक्ष पूरण कुमार ने कहा कि शिक्षक हित काम बंद हो गया है। बीईओ मनमानी कर रहे हैं उन्हें देखने वाला कोई नहीं है। आरीडीईई जब तक नहीं बैठेंगे शिक्षक प्रताड़ित होते रहेंगे।
65 शिक्षकों की प्रोन्नति अटकी
आरडीडीई के नहीं रहने से जिले में 65 शिक्षकों की प्रोन्नति अटकी हुई है। इन शिक्षकों ने आरडीडीई कार्यालय में सितंबर में प्रोन्नति के लिए अपील की थी। आरडीडीई के नहीं रहने से उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसके अलावा सेवांत लाभ, शिक्षक नियोजन, सूचना के अधिकार और स्कूल निरीक्षण के जरूरी काम नहीं हो रहे हैं। इसके अलावा पटना निदेशालय से प्राप्त निर्देश के पालन होने में दिक्कत हो रही है। रोज शिक्षा विभाग से जाने वाली फाइलों पर आरडीडीई के हस्ताक्षर नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा अभी शिक्षक सामंजन में भी आरडीडीई को संज्ञान लेना है जो कि नहीं हो पा रहा है।
पहले भार फिर प्रभार: आरडीडीई
प्रभारी आरडीडीई शाश्वतानंद झा ने कहा कि उनके पास बांका एसएसए और डीईओ का प्रभार है। इसके बाद ही आरडीडीई का प्रभार है। पहले भार को निपटाना जरूरी है। हफ्ते में एक दिन भागलपुर में बैठने का समय निकालेंगे।