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यहां 'गुरूजी' ही गड़बड़ हैं!

PATNA : बिहार के शिक्षा विभाग में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति में हुआ है। नौकरी की चाह में शिक्षकों ने फर्जी दस्तावेज लगा दिए। अधिकारियों की मिलीभगत से बहाली हो गई। वेतन लेने लगे। जब पोल खुली तो मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। कोर्ट ने जांच के आदेश दिए।
रिश्वतखोरी के नीचे जांच दब गई तो हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि जून ख्0क्भ् तक जो शिक्षक स्वत: इस्तीफा देगा उसे क्षमादान मिल जाएगा। धड़ाधड़ ख्000 से अधिक इस्तीफों ने फर्जीवाड़े का रिकॉर्ड बना दिया। आई नेक्स्ट शिक्षा विभाग के सबसे बड़े भ्रष्टाचार की हर परत को उजागर करने जा रहा है। शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि इस्तीफों से कई गुना अधिक शिक्षक फर्जी प्रमाण पत्र पर आज भी नौकरी कर रहे हैं। हाईकोर्ट को जब इस बात का अंदेशा हुआ तो निगरानी विभाग को जिम्मेदारी दी गई। निगरानी विभाग को ख्9 फरवरी तक फर्जी शिक्षकों के कागजात जुटा कार्रवाई करनी है। लेकिन, ख्00 से अधिक शिक्षकों पर एफआईआर ही दर्ज हुई।
क्भ् तक का अल्टीमेटम
नियोजित शिक्षक फर्जीवाड़ा मामले में हाईकोर्ट के तेवर सख्त हैं। निगरानी को कई बार कोर्ट फटकार लगा चुका है। दूसरी तरफ निगरानी ने भी दबाव बढ़ा दिया है लेकिन नोडल अफसर का रवैया अपने तरीके का है। फर्जी प्रमाण पत्र मामले में कई अफसरों के मिलीभगत की भी आशंका है। इधर निगरानी ने जिलों के नोडल अफसरों पर सख्ती दिखाई है। उन्हें हर हाल में अपने प्रभार वाले जिलों के नियोजित शिक्षकों के प्रमाणपत्र फोल्डर क्भ् फरवरी तक निगरानी को मुहैया कराने का अल्टीमेटम दिया गया है। इस समय सीमा का उल्लंघन करने वाले अफसरों पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। बता दें कि नियोजित फ्.ख्फ् लाख शिक्षकों में से शिक्षा पदाधिकारियों को अब तक क्.9म् लाख शिक्षकों के प्रमाणपत्रों के फोल्डर ही मिले हैं, जिनमें से तकरीबन म्भ् हजार फोल्डर निगरानी को सौंपे गए है.
फर्जी थे सर्टिफिकेट
हाईकोर्ट के वकील दीनू कुमार का कहना है कि काउंसलिंग के समय जमा सर्टिफिकेट में कुछ फर्जी थे। मेरिट लिस्ट में आने के लिए ऐसा किया गया । बाद में अधिकारियों की मिलीभगत से ऑरिजनल डॉक्यूमेंट लगा दिए गए। काउंसलिंग के समय लगे दस्तावेज और कार्यालय में जमा दस्तावेज की जांच हो तो बड़ी संख्या में फर्जीवाड़ा उजागर होगा.
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