पटना, जेएनएन। इस बार बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
(बीएसईबी) माध्यमिक वार्षिक परीक्षा (मैट्रिक)-2019 के रिजल्ट ने एक बार
फिर सिमुलतला के छात्रों की बल्ले-बल्ले हुई है। रिजल्ट में बदलाव तो हुआ
है पर सिमुलतला के लिए। पिछले एक साल में सभी जिलों के जिला व मॉडल स्कूल
में बड़े स्तर पर निवेश किए गए। इससे छात्रों की संख्या तो बढ़ी पर परिणाम
में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आया।
शिक्षकों को दी गई थी विशेष ट्रेनिंग
प्रयोगशाला को दुरुस्त करने के लिए पांच लाख रुपये भी खर्च किए गए। इन स्कूलों के शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग भी दी गई थी। इसका परिणाम मैट्रिक रिजल्ट में देखने की उम्मीद शिक्षा विभाग के अधिकारी जता रहे। पटना के जिला शिक्षा पदाधिकारी ज्योति कुमार का कहना है कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। विशेषकर पटना के राजकीय कन्या विद्यालय गर्दनीबाग, बांकीपुर, बीएन कॉलेजिएट, पटना हाईस्कूल, पटना कॉलेजिएट के छात्रों ने पूर्व में ली गई परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किए हैं।
राज्य के कई स्कूलों पर थी विशेष नजर
राजधानी के सबसे पुराने संत जेवियर स्कूल से भी शिक्षकों को काफी उम्मीद थी। हर साल इस स्कूल के छात्र टॉप-10 में स्थान बनाते आए थे, पर इस बार परिणाम अलग रहे। दरभंगा, जमालपुर, मोतिहारी आदि शहरों में कई कॉन्वेंट स्कूल हैं, जिसमें बिहार बोर्ड के सिलेबस को फॉलो किया जाता है। 90 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ. रामनरेश शर्मा ने बताया कि दो दशक पहले बिहार बोर्ड के रिजल्ट में निजी व प्रतिष्ठित सरकारी स्कूलों का जलवा रहता था। बिहार बोर्ड से मान्यता प्राप्त कई स्कूल अब सीबीएसई का सिलेबस फॉलो करते हैं। बावजूद कई जिलों में कई अच्छे निजी स्कूल हैं, जिनके बच्चे मैट्रिक में बेहतर अंक प्राप्त करते हैं।
शिक्षकों को दी गई थी विशेष ट्रेनिंग
प्रयोगशाला को दुरुस्त करने के लिए पांच लाख रुपये भी खर्च किए गए। इन स्कूलों के शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग भी दी गई थी। इसका परिणाम मैट्रिक रिजल्ट में देखने की उम्मीद शिक्षा विभाग के अधिकारी जता रहे। पटना के जिला शिक्षा पदाधिकारी ज्योति कुमार का कहना है कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। विशेषकर पटना के राजकीय कन्या विद्यालय गर्दनीबाग, बांकीपुर, बीएन कॉलेजिएट, पटना हाईस्कूल, पटना कॉलेजिएट के छात्रों ने पूर्व में ली गई परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किए हैं।
राज्य के कई स्कूलों पर थी विशेष नजर
राजधानी के सबसे पुराने संत जेवियर स्कूल से भी शिक्षकों को काफी उम्मीद थी। हर साल इस स्कूल के छात्र टॉप-10 में स्थान बनाते आए थे, पर इस बार परिणाम अलग रहे। दरभंगा, जमालपुर, मोतिहारी आदि शहरों में कई कॉन्वेंट स्कूल हैं, जिसमें बिहार बोर्ड के सिलेबस को फॉलो किया जाता है। 90 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ. रामनरेश शर्मा ने बताया कि दो दशक पहले बिहार बोर्ड के रिजल्ट में निजी व प्रतिष्ठित सरकारी स्कूलों का जलवा रहता था। बिहार बोर्ड से मान्यता प्राप्त कई स्कूल अब सीबीएसई का सिलेबस फॉलो करते हैं। बावजूद कई जिलों में कई अच्छे निजी स्कूल हैं, जिनके बच्चे मैट्रिक में बेहतर अंक प्राप्त करते हैं।