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समान काम समान वेतन पर SC मे हुई सुनवाई, वेतन है शिक्षकों का मौलिक अधिकार

पटना [राज्य ब्यूरो]। बिहार के नियोजित शिक्षकों के समान काम समान वेतन के मामले पर मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय में एक बार फिर सुनवाई हुई। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि वेतन शिक्षकों का मौलिक अधिकार है और उन्हें समान काम का समान वेतन मिलना चाहिए।

मंगलवार को शिक्षक संगठन के वकील ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखा जिसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि नियोजित शिक्षक क्या टीईटी परीक्षा पास हैं? तो शिक्षक संगठन के वकील ने कहा हां पास हैं, लेकिन यह परीक्षा वेतन वृद्वि के लिए ली गयी थी नियोजन के लिए नहीं। कोर्ट ने अन्य मसले पर भी जानकारी ली। आज की बहस समाप्त हो गयी अब इस मसले पर 16 अगस्त को एक बार फिर सुनवाई होगी।
बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश यूयू ललित और अभय मनोहर सप्रे की कोर्ट में समान वेतन पर 31 जुलाई से सुनवाई की प्रक्रिया चल रही है। कोर्ट ने अब तक राज्य सरकार के वकीलों का पक्ष जाना है। आज की सुनवाई इस वजह से महत्वपूर्ण रही क्योंकि कोर्ट ने शिक्षक संगठनों का पक्ष जाना और उनका तर्क सुना।

आज की सुनवाई के लिए बिहार के शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन, उप निदेशक माध्यमिक शिक्षा अमित कुमार और स्टेट अफसर रविशंकर कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने के लिए दिल्ली पहुंचे थे।

बता दें कि बीते वर्ष अक्टूबर में पटना हाईकोर्ट ने अपने फैसले में प्रदेश के साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों को नियमित शिक्षकों की भांति समान वेतन और सुविधा देने के निर्देश दिए थे। जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी।

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