रोहतास। रिश्वतखोरी मामले में दो साधनसेवियों के बेउर जेल जाने के बाद
बीआरसी भवन में लगभग एक साल से पड़े शिक्षकों का सर्विस बुक अब लौटाया जा
रहा है। इसके पहले जब शिक्षक सर्विस बुक जमा करने जाते थे, तो साधनसेवियों
द्वारा उनसे नाजायज राशि की मांग की जाती थी।
हालांकि कई शिक्षकों ने सर्विस बुक में वेतन निर्धारण के लिए बीआरसी में राशि मांगे जाने की शिकायत अधिकारियों से की थी। लेकिन उनकी शिकायत अनसुनी कर दी गई। इस फैसले से भले ही कोई शिक्षक बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन मन ही मन खुश भी हैं। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बीआरसी द्वारा शिक्षकों का इतना शोषण किया जा रहा था कि विद्यालय में पांच मिनट विलंब से जाने के बाद पांच हजार की मांग की जाती थी।
बताते चलें कि चार दिन पूर्व एक शिक्षक ने डीएम से साधनसेवी प्रियरंजन राय व पुष्पेन्द्र कुमार मौर्य पर सर्विस बुक व वेतन निर्धारण में 30 हजार रुपए मांगे जाने की लिखित शिकायत की थी। साथ ही मोबाइल में किए गए टेप भी सुनाया था। डीएम ने दोनों शिक्षकों को बुलाकर पूछताछ की तो घूस मांगने की पुष्टि हुई। डीएम के निर्देश पर दोनों शिक्षकों को मॉडल थाना के हवाले कर दिया गया। जिन्हें मंडलकारा सासाराम भेजा गया। यहां से अगले दिन इस मामले को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दोनों साधनसेवियों को बेउर जेल भेज दिया गया। उनके जेल जाने के बाद आनन-फानन में शिक्षकों का सर्विस बुक लौटाया जा रहा है।
हालांकि कई शिक्षकों ने सर्विस बुक में वेतन निर्धारण के लिए बीआरसी में राशि मांगे जाने की शिकायत अधिकारियों से की थी। लेकिन उनकी शिकायत अनसुनी कर दी गई। इस फैसले से भले ही कोई शिक्षक बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन मन ही मन खुश भी हैं। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बीआरसी द्वारा शिक्षकों का इतना शोषण किया जा रहा था कि विद्यालय में पांच मिनट विलंब से जाने के बाद पांच हजार की मांग की जाती थी।
बताते चलें कि चार दिन पूर्व एक शिक्षक ने डीएम से साधनसेवी प्रियरंजन राय व पुष्पेन्द्र कुमार मौर्य पर सर्विस बुक व वेतन निर्धारण में 30 हजार रुपए मांगे जाने की लिखित शिकायत की थी। साथ ही मोबाइल में किए गए टेप भी सुनाया था। डीएम ने दोनों शिक्षकों को बुलाकर पूछताछ की तो घूस मांगने की पुष्टि हुई। डीएम के निर्देश पर दोनों शिक्षकों को मॉडल थाना के हवाले कर दिया गया। जिन्हें मंडलकारा सासाराम भेजा गया। यहां से अगले दिन इस मामले को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दोनों साधनसेवियों को बेउर जेल भेज दिया गया। उनके जेल जाने के बाद आनन-फानन में शिक्षकों का सर्विस बुक लौटाया जा रहा है।