पटना. राज्यकर्मियों को सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा के अनुरूप सैलरी देने की प्रक्रिया भले ही शुरू हो गई है लेकिन भौतिक लाभ के लिए कर्मियों को साल भर का इंतजार करना पड़ सकता है। कारण है कि पूर्व मुख्य सचिव जीएस कंग की अध्यक्षता में गठित हो रही तीन सदस्यीय पे-कमेटी की रिपोर्ट पर ही पूरी प्रक्रिया निर्भर करेगी।
कमेटी में वित्त विभाग के प्रधान सचिव रवि मित्तल व सचिव (व्यय) राहुल सिंह सदस्य होंगे। छठवें वेतन आयोग के समय ऐसी ही कमेटी बनी थी, तब रिपोर्ट आने में एक साल का समय लगा था। वैसे कर्मचारी संघों ने पे-कमेटी गठन की कवायद को फिजूल करार दिया है और नये वर्ष में आंदोलन की घोषणा तक कर दी है। उनका कहना है कि न पे-बैंड बदला है, न ही पद समाप्त किये गये हैं तो फिर कमेटी क्यों? वेतन आयोग ने जो फार्मूला तय किया है, जो मैट्रिक्स निर्धारित किया है, उसी अनुरूप नया वेतनमान निर्धारित कर दिया जाना चाहिए।
25 फीसदी खाली पद से सरकारी खजाने पर घटेगा बोझ
राज्य में विभिन्न सेवा के कुल 5,78,207 पद स्वीकृत हैं। इनमें 1,39,406 यानी 25% पद खाली हैं। माना जा रहा है कि सातवां वेतन मिला तो कर्मियों की तनख्वाह में 14% तक की वृद्धि होगी। पद खाली रहने से सरकारी खजाने पर बोझ कम पड़ेगा। इसी साल के बजट को देखें तो सरकार करीब 18 हजार करोड़ कर्मचारियों के वेतन पर खर्च कर रही है और पेंशन पर व्यय 8,178 करोड़ है। सातवां वेतनमान लागू होने से वेतन व पेंशन मद में तकरीबन 5,000 करोड़ से अधिक सालाना भार बढ़ने की उम्मीद है।
क्या इस बार भी होगी नोशनल की आजमाइश
यह तीसरी मर्तबा होगा जब राज्य के कर्मियों को केंद्रीय कर्मियों के समतुल्य वेतन लाभ मिलेगा। छठवां वेतनमान देते समय सरकार ने नोशनल का फार्मूला आजमाया था। तब वेतनमान 1 जनवरी 2006 के प्रभाव से लागू माना गया लेकिन वास्तविक लाभ 1 अप्रैल 2017 से दिया गया। पांचवां वेतनमान लागू होते वक्त भी ऐसा ही हुआ था। राज्य सरकारी कर्मचारी संघ के महामंत्री उमेश सिंह ने कहा कि इसी मंशा से सरकार नया वेतनमान देने में टाल-मटोल कर रही है। पिछले दो मौकों पर सरकारी कर्मी 15 महीने के लाभ से वंचित हो चुके हैं। इसके विरोध में 16 जनवरी से हमारा धरना-प्रदर्शन शुरू होगा।
क्या हुआ था 6वें वेतन आयोग की रिपोर्ट के बाद
केंद्र सरकार ने 6वें वेतन आयोग की रिपोर्ट 1 जनवरी 2006 से लागू की। इसके आलोक में 30 दिसंबर 2008 को राज्य में पे-कमेटी बनी। कमेटी ने 21 दिसंबर 2009 को रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने कर्मियों को पुनरीक्षित वेतनमान का नोशनल लाभ 1 जनवरी 2006 के प्रभाव से ही दिया लेकिन कर्मियों को वास्तविक लाभ 1 अप्रैल 2007 से मिला।
कर्मचारियों की ये हैं मूल मांगें
- न्यूनतम वेतन 18,000 से बढ़ाकर 26,000 किया जाए।
- यात्रा/ परिवहन भत्ते को महंगाई के हिसाब से रैशनलाइजेशन किया जाए।
-एचआरए पुराने फार्मूले पर तय किया जाए।
-बच्चों की शिक्षा का अलाउंस कम से कम 3000 रुपये रखा जाए।
-चिकित्सा भत्ता 2000 किया जाए।
जिन भत्तों को 7वें वेतन आयोग ने समाप्त कर दिया है उन पर पुनर्विचार किया जाए। केंद्र सरकार ने अपने 43 लाख कर्मचारियों और 57 लाख पेंशनभोगियों को 7 वां वेतन देने की घोषणा 1 जनवरी 2016 के प्रभाव से की है। कर्मचारियों को अगस्त माह में एरियर मिला है।
कमेटी में वित्त विभाग के प्रधान सचिव रवि मित्तल व सचिव (व्यय) राहुल सिंह सदस्य होंगे। छठवें वेतन आयोग के समय ऐसी ही कमेटी बनी थी, तब रिपोर्ट आने में एक साल का समय लगा था। वैसे कर्मचारी संघों ने पे-कमेटी गठन की कवायद को फिजूल करार दिया है और नये वर्ष में आंदोलन की घोषणा तक कर दी है। उनका कहना है कि न पे-बैंड बदला है, न ही पद समाप्त किये गये हैं तो फिर कमेटी क्यों? वेतन आयोग ने जो फार्मूला तय किया है, जो मैट्रिक्स निर्धारित किया है, उसी अनुरूप नया वेतनमान निर्धारित कर दिया जाना चाहिए।
25 फीसदी खाली पद से सरकारी खजाने पर घटेगा बोझ
राज्य में विभिन्न सेवा के कुल 5,78,207 पद स्वीकृत हैं। इनमें 1,39,406 यानी 25% पद खाली हैं। माना जा रहा है कि सातवां वेतन मिला तो कर्मियों की तनख्वाह में 14% तक की वृद्धि होगी। पद खाली रहने से सरकारी खजाने पर बोझ कम पड़ेगा। इसी साल के बजट को देखें तो सरकार करीब 18 हजार करोड़ कर्मचारियों के वेतन पर खर्च कर रही है और पेंशन पर व्यय 8,178 करोड़ है। सातवां वेतनमान लागू होने से वेतन व पेंशन मद में तकरीबन 5,000 करोड़ से अधिक सालाना भार बढ़ने की उम्मीद है।
क्या इस बार भी होगी नोशनल की आजमाइश
यह तीसरी मर्तबा होगा जब राज्य के कर्मियों को केंद्रीय कर्मियों के समतुल्य वेतन लाभ मिलेगा। छठवां वेतनमान देते समय सरकार ने नोशनल का फार्मूला आजमाया था। तब वेतनमान 1 जनवरी 2006 के प्रभाव से लागू माना गया लेकिन वास्तविक लाभ 1 अप्रैल 2017 से दिया गया। पांचवां वेतनमान लागू होते वक्त भी ऐसा ही हुआ था। राज्य सरकारी कर्मचारी संघ के महामंत्री उमेश सिंह ने कहा कि इसी मंशा से सरकार नया वेतनमान देने में टाल-मटोल कर रही है। पिछले दो मौकों पर सरकारी कर्मी 15 महीने के लाभ से वंचित हो चुके हैं। इसके विरोध में 16 जनवरी से हमारा धरना-प्रदर्शन शुरू होगा।
क्या हुआ था 6वें वेतन आयोग की रिपोर्ट के बाद
केंद्र सरकार ने 6वें वेतन आयोग की रिपोर्ट 1 जनवरी 2006 से लागू की। इसके आलोक में 30 दिसंबर 2008 को राज्य में पे-कमेटी बनी। कमेटी ने 21 दिसंबर 2009 को रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने कर्मियों को पुनरीक्षित वेतनमान का नोशनल लाभ 1 जनवरी 2006 के प्रभाव से ही दिया लेकिन कर्मियों को वास्तविक लाभ 1 अप्रैल 2007 से मिला।
कर्मचारियों की ये हैं मूल मांगें
- न्यूनतम वेतन 18,000 से बढ़ाकर 26,000 किया जाए।
- यात्रा/ परिवहन भत्ते को महंगाई के हिसाब से रैशनलाइजेशन किया जाए।
-एचआरए पुराने फार्मूले पर तय किया जाए।
-बच्चों की शिक्षा का अलाउंस कम से कम 3000 रुपये रखा जाए।
-चिकित्सा भत्ता 2000 किया जाए।
जिन भत्तों को 7वें वेतन आयोग ने समाप्त कर दिया है उन पर पुनर्विचार किया जाए। केंद्र सरकार ने अपने 43 लाख कर्मचारियों और 57 लाख पेंशनभोगियों को 7 वां वेतन देने की घोषणा 1 जनवरी 2016 के प्रभाव से की है। कर्मचारियों को अगस्त माह में एरियर मिला है।