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मैदान में नहीं अब मोबाइल पर खेलते हैं बच्चे : बिहार शिक्षक नियोजन Latest Updates

मधेपुरा। विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों के लिए बिहार सरकार के खेल, कला एवं सांस्कृतिक विभाग कितना भी यतन क्यों ने कर लें किंतु खेल शिक्षकों की उदासीनता व मोबाइल के बढ़ते चलन ने विद्यालय में खेल को समृद्ध करने की सरकार की योजनाओं पर पानी फेर दिया है। आलम यह है कि विद्यालय में पढ़ रहे बच्चे घरों में फुर्सत के समय में खेल मैदान जाने की बजाए घरों में मोबाइल पर ही खेल का अभ्यास करते हैं।
जानकारी के अनुसार सरकार ने हरेक प्राथमिक से लेकर माध्यमिक विद्यालयों में खेल को समृद्ध करने के लिए शारीरिक शिक्षकों को नियुक्त किया है। इसके साथ ही हरेक विद्यालयों में खेल का सारा समान भी उपलब्ध करा दिया है ताकि आउटडोर अथवा इंडोर खेलों से रूचि रखने वाले बच्चे मैदान में जाकर अभ्यास कर सके। विभाग का सख्त निर्देश है कि विद्यालय प्रधान द्वारा बनाए गए रूटीन में एक घंटी खेल का भी दिया जाय ताकि हर रोज कुछ न कुछ खेल का अभ्यास बच्चे कर सके। किंतु प्रधानाध्यापक के उदासीनता के कारण इस निर्देश का कराई से पालन नहीं किया जा रहा है।
डिप्लोमा के आधार पर बहाल खेल शिक्षक खुद हैं अप्रशिक्षित
हरेक विद्यालय में शारीरिक शिक्षकों का नियोजन किया गया है। शिक्षकों कि नियोजन में किसी प्रकार की भौतिक परीक्षा नहीं लिया गया है केवल डिप्लोमा के आधार पर ही उनका नियोजन कर दिया गया है। सच्चाई यह है कि विभिन्न फिजिकल कालेज से पास कर आए इन शिक्षकों को खुद ही किसी भी खेल का ज्ञान नहीं है लिहाजा वे खेल के प्रति उदासीन बने हुए हैं।
खेल शिक्षकों को नहीं है खेल का ज्ञान
जब संवाददाता ने विभिन्न विद्यालयों में कार्यरत कुछ खेल शिक्षकों से फुटबाल, वॉलीबाल, क्रिकेट व अन्य खेलों के बारे में जानकारी लेना चाहा तो शिक्षकों को यह भी जानकारी नहीं थी कि फुटबाल के मैदान की लंबाई कितना होता है। हद तो तब जो गई जब गुरुजी यह भी नहीं बता पाएं कि क्रिकेट मैच में दोनों ओर से कितने खिलाड़ी भाग लेते हैं। शिक्षकों की यह स्थिति रहने के कारण ही खेल की स्थिति बदतर है।
क्या कहते हैं प्रशिक्षक
खेल प्रशिक्षक सह जिला खेल एसोसिएशन के सचिव संत कुमार ने कहा कि विद्यालयों मे नियोजित खेल शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है प्रशिक्षण के बाद वे सभी खेलों का संचालन सही तरह से करेंगे यह उम्मीद है।


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