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ढूंढती रहेगी निगरानी, नहीं मिलेगी निशानी : बिहार शिक्षक नियोजन Latest Updates

बक्सर : हाईकोर्ट के निर्देश पर निगरानी विभाग ने शिक्षक बहाली की जांच तो शुरू कर दी है लेकिन, मुखियाजी या यूं कहें कि नियोजन इकाई भी कम खिलाड़ी नहीं हैं। तू डाल-डाल तो मैं पात-पात की तर्ज पर इन लोगों ने इसका काट ढूंढना शुरू कर दिया है। ताकि, निगरानी ढूंढती रह जाये और उसे कोई निशानी नहीं मिले। सूत्रों पर यकीन करें तो तुम ढूंढते रहो.को साकार करते हुए नियोजन इकाइयों ने नियोजन से जुड़े सबूतों को मिटाने का काम शुरू कर दिया है।
 इसी चक्कर में इस खेल से अनजान जिला शिक्षा पदाधिकारी पर गाज गिर गयी। बताते चलें कि निगरानी उपाधीक्षक ने पुलिस निरीक्षकों से केवल मेधा सूची, अंतिम मेधा सूची व चयनित सूची की अभिप्रमाणित छायाप्रति की मांग ही सभी नियोजन इकाइयों से करने के लिए नहीं कहा है अपितु, मास्टर चार्ट जो नियोजन इकाई द्वारा प्राप्त आवेदनों के आधार पर तैयार किया जाता है को भी मांगने के लिए कहा है। यही नहीं नियोजन वर्ष से संबंधित सरकारी दिशा-निर्देश (नियमावली) की प्रति, नियोजन इकाई की कार्यवाही पंजी की छायाप्रति, नियोजित शिक्षकों द्वारा समर्पित आवेदन पत्रों की छायाप्रति, शैक्षणिक प्रमाण पत्रों मसलन मैट्रिक, इंटर, स्नातक व स्नातकोत्तर आदि की अभिप्रमाणित छायाप्रति व प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्रों की अभिप्रमाणित छायाप्रति प्राप्त कर लेने का फरमान सुनाया है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि इसके अलावा भी अन्य कई तरह के फार्मेट पर जानकारियां मांगी जा रही हैं। ऐसे में गुरुजी तो गुरुजी नियोजन इकाइयों के भी हाथ पांव फूल रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि जिले का ऐसा कोई पंचायत या ऐसी कोई नियोजन इकाई नहीं होगी, जिसने बहती गंगा में हाथ नहीं धोया हो। ऐसे में अब जब जांच की बारी आयी है तो इससे जुड़े सभी लोगों के चेहरे की हवा उड़ गयी है। जाहिर सी बात है, जांच होगी और उसमें घोटाला सामने आयेगा तो उसकी आंच कहीं न कहीं सभी जिम्मेवार लोगों पर पड़ेगी। यही कारण है कि चहुंओर हड़कंप की स्थिति व्याप्त है और उससे निपटने के लिए कागजातों को नष्ट किये जाने का काम बदस्तूर जारी है। अब देखना है जांच में दूध का दूध और पानी का पानी होता है या फिर खोदा पहाड़ निकली चुहिया वाली कहावत चरितार्थ होती है।


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