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अप्रैल के दूसरे पखवारे से स्कूलों में तालाबंदी की चेतावनी , शिक्षकों के आंदोलनों में उलझा लाखों बच्चों का भविष्य

मुजफ्फरपुर: प्राइमरी से लेकर इंटरमीडिएट तक के लाखों बच्चों का भविष्य विभिन्न शिक्षक संगठनों के आंदोलनों में उलझ कर रह गया है. हर तरफ इस समय असमंजस का दौर है. स्थिति है कि विभाग व सरकार की ओर से कोई पहल नहीं होने के कारण शिक्षकों का आक्रोश और बढ़ता जा रहा है.
इसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को ही भुगतना पड़ेगा. समान काम के बदले समान वेतन सहित अन्य मांगों को लेकर आंदोलित शिक्षकों की पीड़ा यह भी है कि अभी तक उनसे वार्ता के लिए भी सक्षम पदाधिकारियों की ओर से पहल नहीं हुई है. प्राइमरी से आठवीं तक की वार्षिक परीक्षा का मूल्यांकन बहिष्कार कुछ शिक्षक कर रहे हैं. वहीं बिहार बोर्ड के हाइस्कूल व इंटर की कॉपियों का मूल्यांकन बहिष्कार भी चल रहा है. हैरानी की बात है कि कुछ स्थानीय समस्याएं भी हैं, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण शिक्षा व्यवस्था ठप होने के कगार पर है. शिक्षकों के एचएम पद पर प्रमोशन सहित अन्य मांगों को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ ने अप्रैल के दूसरे पखवारे से स्कूलों में तालाबंदी की चेतावनी दी है.

 
प्रारंभिक स्कूलों में नये सत्र की समय से शुरुआत मुश्किल : 
सरकारी प्राइमरी स्कूलों में 10 अप्रैल को बच्चों को रिपोर्ट कार्ड दिया जाना है. वार्षिक मूल्यांकन की कॉपियों की जांच 27 मार्च से संकुल स्तर पर हो रही है. बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने 10 अप्रैल को रिजल्ट जारी करते हुए 11 अप्रैल से नये सत्र की शुरुआत का निर्देश दिया है. हालांकि, शिक्षकों के दो संगठन कॉपी जांच का विरोध कर रहा है. ऐसे में रिजल्ट आने में देरी हुई, तो इसका प्रभाव अगले सत्र के समय से शुरुआत पर भी पड़ेगा. वहीं अपनी मांगों को लेकर शिक्षक संगठनों ने नये सत्र में तालाबंदी की भी चेतावनी दे दी है. 
 
हाइस्कूल, इंटर के रिजल्ट में विलंब की आशंका 

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सामने इस साल समय से मैट्रिक व इंटर का परीक्षा परिणाम जारी करने की चुनौती होगी. 15 मार्च से ही इंटर की कॉपियों का मूल्यांकन शुरू होना था, लेकिन वित्तरहित व माध्यमिक शिक्षकों के आंदोलन के चलते अभी से मूल्यांकन कार्य ठप है. एक अप्रैल से मैट्रिक के मूल्यांकन में भी शिक्षक संगठनों ने असहयोग की चेतावनी दी है. ऐसे में समय से कॉपियों की जांच नहीं होने पर इसका असर परिणाम पर भी पड़ेगा. हाल फिलहाल अगर शिक्षक संगठनों के साथ सरकार की वार्ता सकारात्मक होती है, तब भी निर्धारित समय से दो हफ्ता विलंब से ही रिजल्ट जारी कर पाना संभव होगा.

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