बिहार में इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2026 को लेकर इस बार प्रशासन पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। परीक्षा ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने वाले 40 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों से 48 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
शिक्षा अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा केंद्रों से यह रिपोर्ट मिली थी कि कुछ शिक्षक समय पर ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हुए, जबकि कुछ ने अपने दायित्वों का ठीक से निर्वहन नहीं किया।
⚠️ परीक्षा ड्यूटी में लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस
जिला शिक्षा प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि परीक्षा जैसे संवेदनशील कार्य में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि तय समय में जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो संबंधित शिक्षकों पर—
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विभागीय कार्रवाई
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वेतन रोक
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भविष्य की परीक्षा ड्यूटी से वंचित
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अनुशासनात्मक दंड
जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
🎓 क्यों जरूरी है सख्ती?
इंटरमीडिएट परीक्षा लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती है। यदि परीक्षा संचालन में थोड़ी भी लापरवाही होती है, तो इससे—
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परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल
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छात्रों का मानसिक दबाव
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शिक्षा व्यवस्था की साख पर असर
पड़ता है। यही कारण है कि इस बार शिक्षा विभाग ने पहले ही चेतावनी जारी कर दी थी कि किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं होगी।
🧑🏫 शिक्षकों के लिए स्पष्ट संदेश
यह कार्रवाई पूरे राज्य के शिक्षकों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि—
“परीक्षा ड्यूटी कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।”
जो शिक्षक अपने कर्तव्यों को गंभीरता से नहीं लेंगे, उन्हें नियमों के तहत जवाबदेह ठहराया जाएगा।
📌 आगे क्या होगा?
अब सभी 40 शिक्षकों द्वारा दिए गए जवाब की समीक्षा की जाएगी।
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संतोषजनक जवाब मिलने पर चेतावनी
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असंतोषजनक जवाब पर सख्त कार्रवाई
की संभावना जताई जा रही है।
✅ निष्कर्ष
बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में शिक्षकों पर हुई यह कार्रवाई दिखाती है कि सरकार और शिक्षा विभाग अब परीक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं चाहता। आने वाले दिनों में ऐसी कार्रवाई और तेज हो सकती है।