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19वें दिन भी जारी रहा वित्तरहित कर्मियों का आंदोलन

बेतिया। लगातार 19 दिनों से चल रही वित्तरहित शिक्षकों की हड़ताल अब आक्रमक रूप लेने लगी है। हड़ताली शिक्षकेत्तर कर्मचारी व शिक्षकों ने जहां प्रायोगिक परीक्षा व मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार कर सरकार के सामने चुनौती खड़ा कर दी है। वहीं वित्तरहित कर्मचारियों के समक्ष अब करो या मरो की स्थिति पैदा हो गई है।
इस संदर्भ में वित्त रहित कर्मचारियों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रो. परवेज आलम व रानी कुमारी गुप्ता ने कहा कि आंदोलन पर बैठे शिक्षकों की मांग जायज है। सरकार हर बार छात्र हित की दुहाई देकर मांग टालती रही है। इस बार भी सरकार के प्रतिनिधि छात्रहित की दुहाई देकर हड़ताल समाप्त करने की आग्रह कर रहे है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। सरकार की उनकी मांगे माननी होगी। उन्होंने बताया कि आगामी 18 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जिला में कार्यक्रम संभावित है। अगर उनकी मांगे नहीं मानी गई तो उनके सभा में आंदोलन किया जाएगा। बताया कि 65 वर्ष की सेवा अवधि, अनुदान की एकमुस्त भुगतान व समान काम के बदले समान वेतन आदि मांगों को ले कर मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को स्वयं वार्ता करनी चाहिए, तभी हड़ताल समाप्त किया जा सकता है। अन्यथा अब वित्तरहित शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारी चरणबद्ध आंदोलन पर उतारू होंगे और यह प्रक्रिया आत्म दाह तक चलेगी। मौके पर काशीनाथ प्रसाद, शौत अली, मंसूर आलम, डा. श्यामसुंदर महतो, रिजवाना परवीन, सत्येंद्र राम प्रजापति, हरेंद्र किशोर मिश्र, अरूण कुमार पांडेय, राज कुमार, रामेश्वर प्रसाद चौधरी, प्रमोद कुमार यादव, रत्नेश्वर राव, नंदकिशोर प्रसाद कुशवाहा, मुरारी तिवारी आदि शामिल रहे।

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