पटना, 24 जूनःबिहार
के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर तो हमेशा ही सवालों के घेरे में
रहता है. इस बार सवाल यहां के स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताब पर उठा
है. सरकार ने तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों के लिए किताब की छपाई का
जिम्मा बिहार स्टेट
टेक्स्ट बुक पब्लिलिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड कंपनी को सौंपा था. किताबों को
छापने के दौरान ऐसी लापरवारी बरती गई कि किताब में गलत रंग का झंडा छपा है
और साथ इसी रंग में सारी किताबें की छपाई कर दी गई है.
बताया जाता है ये किताबें बाजार में आ गई और लोगों ने खरीदना भी शुरू कर दिया. इसकी जानकारी जब शिक्षा विभाग को लगी तो विभाग ने आनन-फानन में सभी शिक्षा पदाधिकारियों को इसकी सूचना दी और किताबों को नहीं बांटने का निर्देश दिया गया. किताब की जांच में पाया गया कि कक्षा तीन के पर्यावरण और हम के अंतिम पेज पर राष्ट्र गान के साथ राष्ट्रीय ध्वज का रंग ही बदला हुआ है. हैरानी की बात ये है कि हर साल बड़ी संख्या में किताबों की छपाई की जाती है, लेकिन जब महज तीसरी कक्षा के बच्चों के किताबों में ही राष्ट्रीय ध्वज के बारे में गलत जानकारी दी जाएगी तो बच्चे ना सिर्फ कन्फ्यूजन बल्कि गलत इंफॉर्मेशन का भी शिकार होंगे.
दरअसल इस कक्षा की किताब में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को उल्टा छापा गया है. बिहार स्टेट टेक्सट बुक पब्लिशिंग कॉरपोरेशन ने तीसरी कक्षा की हिंदी की किताब में ये लापरवाही की है. किताब में तिरंगा को गलत दर्शाया गया है, जिसमें ध्वज के शीर्ष पर हरे रंग के साथ देखा गया है और नीचे केसरिया रंग छाप दिया है. ये गलती किताब के आखिरी पेज पर की गई है, जिसमें राष्ट्रगान छपा हुआ जिसे उल्टे हाथ की तरफ गलत ढंग से तिरंगा दर्शाया गया है.
इस बारे में जिला सर्व शिक्षा अभियान के प्रमुख के यूके सिंह ने कहा कि यह प्रकाशक और प्रिंटर की ओर से एक गलती है. संबंधित अधिकारियों को गलत किताबें वापस पाने और सही प्रदान करने के लिए निर्देश दे दिए गए हैं. वहीं, इस बारे में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक अरुण कुमार चौधरी ने बताया गया कि बैक कवर पर लिखे गए राष्ट्रगान के शब्दों में भी गलती देखी गई. चौधरी के अनुसार 'हिंदी' अक्षर के ऊपर एक डॉट, जिसे अनुस्वार कहा जाता है. वह नहीं लगाया है. अनुस्वार का प्रयोग अक्षरों के बीच में- एम या एन की ध्वनि को प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है.
बताया जाता है ये किताबें बाजार में आ गई और लोगों ने खरीदना भी शुरू कर दिया. इसकी जानकारी जब शिक्षा विभाग को लगी तो विभाग ने आनन-फानन में सभी शिक्षा पदाधिकारियों को इसकी सूचना दी और किताबों को नहीं बांटने का निर्देश दिया गया. किताब की जांच में पाया गया कि कक्षा तीन के पर्यावरण और हम के अंतिम पेज पर राष्ट्र गान के साथ राष्ट्रीय ध्वज का रंग ही बदला हुआ है. हैरानी की बात ये है कि हर साल बड़ी संख्या में किताबों की छपाई की जाती है, लेकिन जब महज तीसरी कक्षा के बच्चों के किताबों में ही राष्ट्रीय ध्वज के बारे में गलत जानकारी दी जाएगी तो बच्चे ना सिर्फ कन्फ्यूजन बल्कि गलत इंफॉर्मेशन का भी शिकार होंगे.
दरअसल इस कक्षा की किताब में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को उल्टा छापा गया है. बिहार स्टेट टेक्सट बुक पब्लिशिंग कॉरपोरेशन ने तीसरी कक्षा की हिंदी की किताब में ये लापरवाही की है. किताब में तिरंगा को गलत दर्शाया गया है, जिसमें ध्वज के शीर्ष पर हरे रंग के साथ देखा गया है और नीचे केसरिया रंग छाप दिया है. ये गलती किताब के आखिरी पेज पर की गई है, जिसमें राष्ट्रगान छपा हुआ जिसे उल्टे हाथ की तरफ गलत ढंग से तिरंगा दर्शाया गया है.
इस बारे में जिला सर्व शिक्षा अभियान के प्रमुख के यूके सिंह ने कहा कि यह प्रकाशक और प्रिंटर की ओर से एक गलती है. संबंधित अधिकारियों को गलत किताबें वापस पाने और सही प्रदान करने के लिए निर्देश दे दिए गए हैं. वहीं, इस बारे में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक अरुण कुमार चौधरी ने बताया गया कि बैक कवर पर लिखे गए राष्ट्रगान के शब्दों में भी गलती देखी गई. चौधरी के अनुसार 'हिंदी' अक्षर के ऊपर एक डॉट, जिसे अनुस्वार कहा जाता है. वह नहीं लगाया है. अनुस्वार का प्रयोग अक्षरों के बीच में- एम या एन की ध्वनि को प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है.