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राज्य सरकार शिक्षकों का कर रही है शोषण, दो माह से वेतन नहीं मिलने से शिक्षक कर्ज में डूबे

शिक्षक नेता मंगल कुमार साह ने कहा कि सरकार नियोजित शिक्षकों को मानसिक रूप से परेशान कर रही है। सरकार कि नीति नियोजित शिक्षकों कि शोषण करने वाली हैं।
31 अक्टूबर 2017 को उच्च न्यायालय पटना के आदेश समान काम का समान वेतन देने की फैसला नियोजित शिक्षकों के पक्ष में आने के बाद नियोजित शिक्षकों के खिलाफ में बिहार सरकार 15 दिसम्बर 2017 को सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर दी। सरकार की पोल भी खुल गई जो कि विधान सभा में पटना उच्च न्यायालय के आदेश को सम्मान करने की बात कह रही थी। एक तरफ सरकार नियोजित शिक्षकों को सम्मान देने की बात करती हैं तो दूसरी ओर आर्थिक शोषण सुप्रीम कोर्ट में करा रही हैं ।

सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की बात करती हैं, परंतु हवा हवाई गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की बात कर रही है। जिस राज्य में शिक्षकों को सम्मान नहीं मिलता है उस राज्य कि शिक्षा कैसा होगा? नियोजित शिक्षकों को बिहार सरकार चपरासी से तुलना करती तो भारत सरकार ड्राइवर से तुलना करती है यह कहां का न्याय है? उन्होंने कहा कि आज इस तपती हुई महंगाई में वेतन के अभाव में नियोजित शिक्षक भुखमरी के शिकार हो रहे हैं। दो माह से वेतन नहीं मिला है। सरकार की अधिकारी नियोजित शिक्षकों के मामले में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं । सरकार प्रति माह वेतन देने की बात कहकर समाज में नियोजित शिक्षकों को अपमानित कर रही हैं। कुछ दिन पहले उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने बयान दिए कि प्रति माह शिक्षकों कि वेतन भुगतान होगा। उप मुख्यमंत्री का बयान नियोजित शिक्षकों को हास्यास्पद लग रहा है।

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