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आरटीई लागू होने के बाद अप्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति गलत, नियमित बहाली क्यों नहीं

पटना/दिल्ली शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) लागू होने के बाद अप्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति गलत है। आईटीई के बाद नियमित शिक्षकों की बहाली होनी चाहिए थी। बिहार छोड़ अन्य किसी भी राज्य में आरटीई के बाद शिक्षकों को नियोजन नहीं हुआ है।
3.56 लाख नियोजित शिक्षकों को समान काम समान वेतन मामले पर मंगलवार को 15 वें दिन दोनों पालियों में लगभग साढ़े तीन घंटे बहस के बाद भी सुनवाई अधूरी रही। अगली सुनवाई 29 अगस्त को होगी। न्यायाधीश एएम सप्रे और यूयू ललित की कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

-कोर्ट ने पूछा- सातवां वेतन लागू होने के बाद नियोजित और नियमित वेतनमान वाले शिक्षकों के वेतन में कितना अंतर हो जाएगा। शिक्षकों की कैटोगरी की भी जानकारी मांगी। शिक्षक संघ की ओर से फिर एक बार दोहराया गया कि नियोजित शिक्षकों को समान वेतन नहीं देकर उनके अधिकार का सरकार हनन कर रही है, वहीं सरकार की ओर से फिर एक बार कहा गया- आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि अधिक वेतन दे सके। सरकार ने भरोसा दिलाया कि लगातार नियोजित शिक्षकों के वेतन में बढ़ोतरी जारी रहेगी।

-बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ की ओर से वरीय अधिवक्ता विभा मखीजा ने कहा कि सरकार फंड नहीं होने का बहाना बना रही है। 2006 के बाद नियोजित शिक्षकों को समान वेतन पाने का अधिकार है। नियोजन की न्यूनतम योग्यता इंटरमीडिएट है। हालांकि इसके पहले शिक्षा मित्र के रूप में मैट्रिक स्तर पर ही रखा गया था। कोर्ट में चल रहे बहस में अलग-अलग शिक्षक संघों और कैटोगरी में भी मतभेद दिख रहे हैं। प्लस टू स्तर के शिक्षक संघों की भी अलग नाराजगी है। शिक्षा मित्र से नियोजित शिक्षकों को समान वेतन नहीं दिया जाना चाहिए। एक वकील के इस बहस पर भी मतभेद उभरे। इसके पहले कई बार केंद्र और राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट से कहा था कि समान वेतन देने की आर्थिक स्थिति नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से एटार्नी जनरल वेणु गोपाल ने कहा था समान वेतन देने में 1.36 लाख करोड़ का अतिरिक्त भार केंद्र सरकार को वहन करना संभव नहीं है। राज्य सरकार के वकील ने भी कहा था कि आर्थिक स्थिति नहीं कि 3.56 लाख नियोजित शिक्षकों को पुराने शिक्षकों के बराबर समान वेतन दे सके। समान काम समान वेतन देने पर सरकार को सालाना 28 हजार करोड़ का बोझ पड़ेगा। एरियर देने की स्थिति में 52 हजार करोड़ भार पड़ेगा।

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