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जुलाई से विश्वविद्यालय में 8 हजार सहायक प्रोफेसर बहाली की शुरू होगी प्रक्रिया

पटना. जुलाई से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर की कमी दूर करने के लिए बहाली प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस माह के अंत तक सभी विश्वविद्ययालों से विषयवार वर्तमान में शिक्षकों की रिक्ति की सूचना शिक्षा विभाग को मिल जाएगी। सभी विषयों में शिक्षकों की रिक्ति राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग को भेजी जाएगी। आयोग के माध्यम से ही शिक्षकों का चयन होना है।
हाल तक बीपीएससी ने विभिन्न विषयों में तीन हजार से अधिक सहायक प्रोफेसर के लिए अभ्यर्थियों का चयन कर अनुशंसा शिक्षा विभाग को भेजी है।

शिक्षा विभाग ने 21 जून को सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों की बैठक बुलाई है। इसमें विवि में शिक्षकों की कमी मामले पर चर्चा होगी। शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार पढ़ाई समय पर पूरा करने के लिए जब तक नियमित सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति नहीं होती है, तब तक गेस्ट फैकल्टी से पढ़ाई पूरा कराने की कार्रवाई पर चर्चा होगी।

लोकसभा चुनाव के पहले ही राज्य में विश्वविद्यालय सेवा आयोग का गठन हो चुका है। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स दिल्ली) से रिटायर्ड प्रो. डॉ. राजवर्धन आजाद विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अध्यक्ष बनाए गए हैं। आयोग में 6 सदस्य नियुक्त किए गए हैं। आयोग काम करने लगा है। अध्यक्ष सहित सदस्य बहाली को लेकर बैठक भी कर रहे हैं। जून के अंत या जुलाई प्रथम सप्ताह में विवि सेवा आयोग को विभिन्न विवि में शिक्षकों की रिक्ति मिल जाएगी। रिक्ति के आधार पर आयोग पात्र अभ्यर्थियों से आवेदन लेगा।


पिछले आकलन में राज्य के 10 विवि में वर्तमान में स्वीकृत पद 13564 हैं, जबकि कार्यरत 6079 हैं। रिक्त पद 7485 हैं। बिहार लोक सेवा आयोग से विवि में शिक्षकों के 3364 पदों पर नियुक्ति के कहा गया था। विभिन्न विषयों में लगभग तीन हजार शिक्षकों की अनुशंसा बीपीएससी से विभाग को आ चुकी है। विभाग भी विवि को शिक्षकों की जरूरत के हिसाब से अनुशंसा कर रहा है।

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