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कोर्ट के फैसले से बिहार सरकार को 54,000 करोड़ रुपये की बचत

नियमित शिक्षकों की भर्ती बंद करने के फैसले से बिहार सरकार को 54,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है जो उसे नियोजित शिक्षकों को नियमित शिक्षकों के बराबर वेतन देने पर एरियर के रूप में देनी पड़ती। इतना ही नहीं राज्य सरकार को 10,460 करोड़ रुपये की वार्षिक बचत भी हुई हुई। ये रकम वेतन में बढ़ोतरी के कारण हर साल शिक्षकों को देनी पड़ती। .

राज्य में चार लाख नियोजित शिक्षक है और एक लाख भर्ती और हो रही है जबकि सरकारी शिक्षकों कि संख्या 60 हजार है और सरकार ने कोर्ट में बताया है कि इस कैडर को मुआवजा देकर हटाने की योजना भी है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की इस दलील को स्वीकार किया कि बिहार में अब स्कूल से बाहर रह गए बच्चों का फीसदी एक रह गया है, जो दस साल पहले 12 था। कोर्ट ने कहा कि डाइंग कैडर के साथ वेतन बराबरी की बात नहीं की जा सकती। जो कैडर समाप्त हो रहा है उसके वेतन को आधार नहीं बनाया जा सकता।.

सरकार पर 20 हजार का जुर्माना : सुप्रीम कोर्ट ने अपील दायर करने में 728 दिनों की देरी करने पर बिहार सरकार पर 20 हजार रुपये का जुर्माना ठोका है। कोर्ट ने कहा जुर्माने की यह रकम संबंधित अधिकारी से वसूली जाए। कोर्ट ने यह भी कहा राज्य सरकार वसूली का प्रमाणपत्र कोट में पेश करेगी। यह रकम सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विस को जाएगी।

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