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प्रश्न है कौन तय करेगा शिक्षकों के मुद्दे ? एक मांग : समान काम, समान वेतन..

प्रश्न है कौन तय करेगा शिक्षकों के मुद्दे ? झूठी
सरकारें , अर्थवाद के कीचड़ में फँसे

राजनीतिक महात्वाकांक्षा से प्रेरित संघों के
भ्रातृघाती नेतृत्व या फिर तमाम संघों में
बंधुआगिरी से मुक्ति की कामना से
संघर्षरत आम शिक्षक । नियोजित शिक्षकों के नेतृत्व का दावा
करने वाले और विभिन्न बहानों से एकीकृत संघर्षों से
इंकार करने वालों से आग्रह है शिघ्रातिशीघ्र अहंकार
का त्याग करें ।हवा के बदले रुख को स्वीकार करें ।
अन्यथा एकता की नयी चेतना के चलते
कहीं उन्हें शिक्षकों का कोपभाजन न बनना पड़े । फिर
एकता की पहल करनेवालों पर यह
जिम्मेवारी है कि शिक्षकों की तमाम श्रेणियों
का विश्वास अर्जित करे । यदि तमाम नियोजितों ने ऐसी
एकता हासिल कर ली तो निश्चय ही हम
निर्णायक संघर्ष खड़ा कर पाने में सफल होंगे ।एक मांग #समान
काम, समान वेतन..

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