बिहार में शिक्षा जगत का एक बड़ा मुद्दा फिर से उच्च स्तर पर उठाया गया है। राज्य के सदस्य विधान परिषद (MLC) जीवन कुमार ने विधानसभा व शिक्षा विभाग के समक्ष शिक्षक समुदाय के महत्वपूर्ण मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया है। इसमें खास तौर पर शिक्षक वेतन (Salary) और कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से रखा गया है।
MLC जीवन कुमार ने यह स्पष्ट किया है कि बिहार के शिक्षकों की आर्थिक स्थिति तथा सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई जा रही है और इसके लिए शिक्षा विभाग को कड़ा संज्ञान लेना चाहिए।
🔹 शिक्षक वेतन को लेकर चिंता
जीवन कुमार ने विधानसभा में कहा कि कई शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है या विलंब से वेतन मिलता है। यह स्थिति शिक्षकों में मानसिक तनाव उत्पन्न कर रही है और उनके जीवन की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।
उन्होंने कहा कि:
✔️ शिक्षा विभाग को वेतन के समय पर भुगतान को प्राथमिकता देनी चाहिए
✔️ वेतन वृद्धि को नियमित रूप से लागू किया जाना चाहिए
✔️ वर्ष 2026 के बजट में शिक्षक वेतन को मजबूती से शामिल किया जाना चाहिए
शिक्षकों का कहना है कि वेतन समय पर मिलने से वे अपने परिवार व खर्चों को बेहतर तरीके से संभाल सकेंगे।
🔹 EPF (कर्मचारी भविष्य निधि) पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, MLC जीवन कुमार ने शिक्षकों के EPF योगदान, जमा राशि और कामकाजी वर्षों के योगदान की नियमितता पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि:
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कई शिक्षकों के EPF खाते समय पर अपडेट नहीं हो रहे
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योगदान में विसंगति पाई जा रही है
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भविष्य सुरक्षा को लेकर संशय है
इस मुद्दे पर उन्होंने शिक्षा विभाग से कहा कि EPF की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नियमितता सुनिश्चित की जाए ताकि शिक्षक अपने भविष्य के लिए सुरक्षित महसूस कर सकें।
🔹 शिक्षक संगठनों में सकारात्मक प्रतिक्रिया
MLC के इस कदम को शिक्षक संगठनों ने स्वागत योग्य बताया है। शिक्षक नेताओं का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ वेतन और EPF तक सीमित नहीं है बल्कि यह शिक्षक सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और न्याय का मामला है।
कई शिक्षक नेताओं ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि अब विभाग तथा सरकार को इन मुद्दों को प्राथमिकता से हल करना चाहिए।
🔹 शिक्षा विभाग को जारी किया संदेश
जीवन कुमार ने सरकार और शिक्षा विभाग को स्पष्ट संदेश दिया कि:
✔️ शिक्षकों के मुद्दों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी
✔️ शिक्षा विभाग को वेतन, EPF तथा सेवा शर्तों को लेकर जवाबदेही निभानी होगी
✔️ शिक्षक समुदाय के साथ संवाद बनाए रखना अनिवार्य है
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक सिर्फ पढ़ाने वाले नहीं हैं, बल्कि वे समाज को आकार देने वाले मौलिक अंग हैं और उनके साथ उचित व्यवहार जरूरी है।
🔹 निष्कर्ष
बिहार में शिक्षक वेतन और EPF मुद्दा विधानसभा के स्तर पर उठाया जाना शिक्षा जगत में अपेक्षित बदलाव का संकेत है। यह दर्शाता है कि शिक्षक समुदाय की समस्याओं को केवल रुकी वेतन की सूची तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि उनके भविष्य सुरक्षा, सामाजिक सम्मान और आर्थिक स्थिरता तक विस्तृत किया जा रहा है।
अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग किस तरह इस मुद्दे को गंभीरता से लेता है और कितनी शीघ्रता से समाधान प्रदान करता है।