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बड़े शिक्षक भर्ती घोटाले की पड़ताल: कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में भर्ती को लेकर उठे गंभीर आरोप

उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों के भर्ती और धन उपयोग को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह मामला शिक्षा विभाग की भर्ती प्रक्रिया और वित्तीय प्रबंधन के बारे में सवाल खड़े करता है। विभाग ने इस संदर्भ में तत्काल जांच के आदेश जारी किए हैं और मामले की तह तक जाने के लिए टीम गठित की गई है।

इस विवाद का केंद्र कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में नई नियुक्तियों तथा खर्च की प्रक्रिया को लेकर है। शिकायतों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा और कुछ मामलों में अनियमित तरीके से धन निकासी के संकेत भी मिले हैं।


🔹 धनराशि और भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल

रायबरेली जिले में विभागीय जांच के दौरान यह सामने आया कि कस्तूरबा गांधी विद्यालयों के लिए आवंटित धनराशि का उपयोग बिना छात्राओं की वास्तविक उपस्थिति के दिखाया गया। हालांकि विभाग का कहना है कि प्रेरणा पोर्टल पर सही जानकारी दर्ज होना अनिवार्य है, लेकिन खातों से आवंटित राशि निकाल ली गई और उसके उपयोग की पुष्टि नहीं हो पाई है।

ऐसे मामलों में अक्सर विभागीय नियमों के अनुसार छात्राओं की संचालन रिपोर्ट, उपस्थिति रिकॉर्ड और पोर्टल अपलोड किए गए डेटा को पारदर्शी रखना आवश्यक होता है, ताकि कोई अनियमितता न हो। इस प्रकार की शिकायतें शिक्षा व्यवस्था में विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।


🔹 क्या है कस्तूरबा गांधी विद्यालय योजना?

कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय (KGBV) भारत सरकार तथा राज्य शिक्षा विभागों द्वारा संचालित एक सामाजिक समावेशन योजना है जिसका उद्देश्य वंचित वर्ग की बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित आवास प्रदान करना है। भारत सरकार की इस योजना में छात्राओं के रहने, भोजन और पढ़ाई के खर्च के लिए बजट जारी होता है और विभाग को वही धनराशि खर्च दिखाने का अधिकार होता है।

वित्तीय मदों का सही तरीके से उपयोग और उपस्थिति के साथ रिपोर्टिंग जरूरी होती है, क्योंकि छात्राओं की उपस्थिति के आधार पर ही वितरण और खर्च की अनुमति मिलती है।


🔹 शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया और जांच

घोटाले की शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं और अधिकारियों तथा संबंधित कर्मचारियों से जवाब तलब किया है। विभाग का कहना है कि जिन भी अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की जांच से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आ सकती हैं और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने में मदद मिलेगी। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि अगर जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो संबंधित नियमों के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


🔹 शिक्षा व्यवस्था पर असर

इस तरह की खबरें केवल एक जिले तक सीमित नहीं रह जातीं बल्कि पूरे शिक्षा साफ-सुथरी व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगा सकती हैं। जब भर्ती और वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता नहीं होती है, तो शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों के बीच विघटन की भावना उत्पन्न हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि:
✔️ भर्ती प्रक्रिया की पूर्ण जांच होनी चाहिए
✔️ सत्यापन और रिकॉर्डिंग सिस्टम मजबूत होना चाहिए
✔️ विभागीय जवाबदेही तय होनी चाहिए

ताकि भविष्य में शिक्षा से जुड़े घोटालों का परिदृश्य कम हो और सिस्टम अधिक भरोसेमंद बने।


🔹 निष्कर्ष

कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में भर्ती और धन उपयोग को लेकर उठे आरोप शिक्षा क्षेत्र के लिए एक चेतावनी की तरह हैं। विभागीय जांच और कार्रवाई आवश्यक है ताकि दोषियों को दंडित किया जा सके और भविष्य के लिए पारदर्शी और जवाबदेह भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।

यह मामला शिक्षा जगत में पारदर्शिता, जवाबदेही और नीतिगत मजबूती की जरूरत को पुनः उजागर करता है, खासकर जब यह संवेदनशील विषय — लड़की शिक्षा और सरकारी नियुक्तियों से जुड़ा हो।

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