बिहार के सरकारी स्कूलों में अनुशासन को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। अब यदि कोई शिक्षक लगातार तीन दिनों तक स्कूल देर से पहुंचता है, तो उसकी एक दिन की छुट्टी स्वतः दर्ज कर दी जाएगी। यह कार्रवाई ई-शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से की जाएगी, जिससे उपस्थिति और अवकाश का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा।
ई-शिक्षा कोष से होगी उपस्थिति की निगरानी
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी सरकारी शिक्षकों को अपनी उपस्थिति ई-शिक्षा कोष प्रणाली में दर्ज करानी होगी। यह डिजिटल सिस्टम शिक्षकों के समय पर आने-जाने और नियमित उपस्थिति की निगरानी करेगा। लगातार देर से आने की स्थिति में सिस्टम अपने आप कार्रवाई करेगा, जिससे किसी भी तरह की लापरवाही पर रोक लगाई जा सके।
शिक्षकों को समय पालन और कार्य घंटों का पालन अनिवार्य
नए निर्देशों के अनुसार, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को प्रतिदिन कम से कम छह घंटे कार्य करना अनिवार्य होगा। स्कूल समय का पूरी तरह पालन करना होगा और कक्षा में नियमित रूप से पढ़ाई करानी होगी। इसका उद्देश्य छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना और शिक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाना है।
प्रधानाध्यापकों की जिम्मेदारी भी बढ़ी
इस नियम के तहत स्कूल के प्रधानाध्यापकों की भूमिका भी अहम हो गई है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि:
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सभी शिक्षक समय पर स्कूल पहुंचें
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पढ़ाई नियमित रूप से हो
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पाठ योजना तैयार की जाए
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छात्रों की शैक्षणिक प्रगति की समीक्षा की जाए
इसके साथ ही अभिभावकों को भी छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए स्कूल से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा कदम
यह फैसला शिक्षक अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। डिजिटल उपस्थिति प्रणाली के जरिए न केवल शिक्षकों की लापरवाही पर अंकुश लगेगा, बल्कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
बिहार सरकार का यह नया नियम सरकारी स्कूलों में समय पालन और कार्य संस्कृति को मजबूत करेगा। ई-शिक्षा कोष के जरिए सख्त निगरानी से शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ेगी और छात्रों को नियमित व बेहतर शिक्षा मिल सकेगी।