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साइकिल घोटला : अंधेरे में तीर चला रहा शिक्षा विभाग

मुंगेर । विगत दिनों राजकीय जिला स्कूल के एक कमरे में वर्षो से बिहार शिक्षा परियोजना मुंगेर लिखी दर्जनों साइकिलों के बंद होने का मामला प्रकाश में आया था। इसको लेकर शिक्षा विभाग में खलबली गई थी। डीएम के निर्देश पर पूरे मामले की जांच भी शुरू की गई।
लेकिन, धीरे धीरे मामले को ठंडा वस्ता में डालने की तैयारी की जा रही है। क्योंकि अभी तक शिक्षा विभाग के अधिकारी इस रहस्य से पर्दा नहीं उठा सकें हैं कि साइकिल किस मद से खरीदी गई थी और खरीदने के बाद साइकिल वितरित क्यों नहीं किया जा सका। यदि वितरण नहीं भी किया जा सका था तो वे साइकिलें जिला स्कूल के कक्ष में क्यों बंद कर रखी गई थी। मामला प्रकाश में आने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी के द्वारा इस मामले की जांच को लेकर एक जांच कमेटी का गठन कर दिया गया। लेकिन यह जांच कमेटी भी अब तक केवल अंधेरे में ही तीर मार रही है। क्योंकि मामला उजागर होने के एक पखवाड़े के बाद भी इससे जुड़ा कोई तथ्य सामने नहीं आ पाया है। यहां तक कि शिक्षा विभाग के अधिकारी अभी तक यह पता नहीं लगा सकी है कि आखिर किस योजना मद से इन साइकिलों की खरीद की गई थी। कुछ लोगों का कहना है कि साइकिल की खरीद एनपीईजीईआर योजना के तहत एससी-एसटी वर्ग की छात्राओं के बीच वितरण के लिए किया गया था। लेकिन अभी तक इससे जुड़ी संचिका भी सामने नहीं आ पाई है। वहीं सूत्रों का कहना है कि साइकिल की खरीद वर्ष 2007-08 के दौरान की गई थी। उस समय साइकिल वितरण शिविर समाप्त होने के बाद जिला स्कूल के पीछे स्थित छोटी केलाबाड़ी के लोगों के बीच एक हजार रूपए प्रति साइकिल की दर से दर्जनों साइकिल बेच दी गई थी। उस वक्त साइकिल की कीमत लगभग 1700 रुपये थी। वहीं सूत्रों का कहना है कि साइकिल की खरीद संभावित रूप से जिला परिषद के द्वारा राशि उपलब्ध कराई गई थी। लेकिन अब तक विभागीय अधिकारी इसके बारे में जिला परिषद से संपर्क नहीं किए हैं।
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