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जिले में नौ लाख की आबादी अभी भी है निरक्षर

मधेपुरा। जिले में नौ लाख से अधिक की आबादी अभी भी साक्षरता का पाठ नहीं पढ़ पायी है । सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 52 प्रतिशत लोग अभी जिले में साक्षर हो पाए हैं। जबकि वर्ष 2011 के आंकड़ों पर गौर करें तो यह आंकड़ा 38 प्रतिशत था। ऐसे में पांच वर्ष के दौरान में मात्र 14 प्रतिशत लोगों को ही साक्षर किया जा सका है।
जबकि शिक्षा विभाग की ओर से जारी किए गए इस आंकड़े पर भी सवाल खड़ा किया जा रहा है। मालूम हो यहां पर चलने वाले साक्षरता केंद्रों पर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है। जिले भर में साक्षरता केंद्रों पर कहीं पढ़ाई नहीं हो रही है। केवल महापरीक्षा आयोजित कर निरक्षर को ही साक्षर घोषित किया जा रहा है। साक्षरता को लेकर जिले भर में चल रहे अभियान पर ही अब प्रश्न चिन्ह खड़ा होने लगा है।
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बेअसर है जिले में साक्षरता अभियान :
जिले भर में पंचायत स्तर पर चल रहा साक्षरता अभियान पूरी तरह से बेअसर दिखाई दे रहा है। कहने के लिए साक्षरता अभियान को जोर शोर से चलाया जा रहा है। लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ ओर नजर आ रही है। खासकर ग्रामीण इलाकों में अभी लोग साक्षरता केंद्र एवं स्कूल से दूर हैं। इसकी बड़ी वजह संसाधन की कमी एवं रोजगार का अभाव भी है।
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कब तक होगा पूर्ण साक्षर : साक्षरता दर को बढ़ाने के लिए जहां देश भर में अभियान चलाया जा रहा है। वहीं मधेपुरा में यह अभियान अपने मूल मकसद से भटकता हुआ नजर आ रहा है। जिले में अभी कुल 20 लाख की आबादी निवास करती है। ऐसे में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अभी भी 9 लाख 60 हजार की आबादी साक्षरता से दूर है। वहीं जिन लोगों को साक्षर घोषित किया गया है । उस पर भी सवाल खड़ा हो रहा है। ऐसे में यह जिला कब तक पूर्ण साक्षर होगा यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है।
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साक्षरता दर बढ़ाने के लिए जिले भर में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सभी लोक शिक्षा केंद्र पर नियमित रूप से निरक्षर लोगों को पढ़ाने के लिए निर्देश दिया गया है। लोक शिक्षा केंद्र की ओर से गांव गांव में साक्षरता दर बढ़ाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
सुरेंद्र प्रसाद

डीपीओ साक्षरता
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