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बिहार नकल का नहीं ‘अकल’ का प्रदेश है

भास्कर ने 1 जून को यह खबर प्रकाशित की थी
कोई भी टेस्ट को तैयार, मेरे पास साइंस का इकलौता टॉपर बनने का मौका
{दोबारा कॉपी भी जांची जाएगी, इसके बाद फिर बनेगी मेरिट लिस्ट इंटरव्यू में नहीं आए तो रिजल्ट रद्द
{आर्ट्स साइंस के टॉप-5 के 13 विद्यार्थियों को कल 3 बजे इंटरव्यू के लिए बोर्ड दफ्तर में बुलाया गया
{दोनों स्ट्रीम के स्टेट टॉपरों रूबी राय और सौरभ श्रेष्ठ के रिजल्ट पर फिलहाल बिहार बोर्ड ने लगाई रोक
{इंटर आर्ट्स साइंस के टॉपर पर उठे विवाद के बाद शिक्षा विभाग ने लिया कड़ा दूरगामी फैसला
अगले साल से इंटरव्यू के बाद तय होंगे टॉपर


बिहार की बदहाल शिक्षा

इं टर साइंस आर्ट के टॉपरों की मेधा पर सवाल उठने के बाद से जिस तरह शिक्षा व्यवस्था की खामियां सामने रही है, वह हमारे प्रदेश के होनहारों के लिए कहीं से भी ठीक नहीं है। पिछले तीन दिनों के घटनाक्रम ने सबको कठघरे में खड़ा कर दिया है। स्कूल सवालों के घेरे में हैं। बिहार बोर्ड की प्रणाली पर सवाल उठने लगा। शिक्षा विभाग की भूमिका से सबके सब संतुष्ट नहीं दिख रहे। नकल होने देना बहुत अच्छी बात है। बिहार नकल नहीं, अकल के लिए जाना जाता रहा है। मगर, प्रतिभा के साथ खिलवाड़ हो इसका ख्याल रखना भी सिस्टम का काम है। संभव है कि संदेह के घेरे में आए दो बच्चों की गलत तरीके से मदद की गई हो, पर यह भी तो संभव है कि मेरिट लिस्ट में आए कई बच्चे सचमुच मेधावी हों। शेष|पेज 9





बिहार नकल का...





सभीपर एक साथ सवाल कैसे खड़ा किया जा सकता है।

इस पूरे प्रकरण ने सिर्फ कुछ बच्चों, स्कूलों और शिक्षकों-अधिकारियों को घेरे में लाया है बल्कि हमारी पूरी शिक्षा प्रणाली पर सवाल खड़ा कर दिया है। हम ऐसी शिक्षा प्रणाली की कल्पना भी नहीं कर सकते, जिसमें बच्चों की प्रतिभा का सही आकलन ही हो पाए। नकल रोकने के बाद जिस तरह पास होने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट आई है, उसने पठन-पाठन की पोल खोलकर रख दी है। अब परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन प्रणाली पर भी उंगली उठ ही गई। जरूरी है कि शिक्षा विभाग पूरे प्रकरण से सीख ले और फुलप्रूफ सिस्टम तैयार करे। सोचिए, भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन का हमारा ग्राफ कितना गिरा है। हम कदाचार से आगे बढ़ना चाहते हैं या अपने टैलेंट के बल पर? इस सवाल का जवाब सरकार से पहले उन अभिभावकों को देना चाहिए, जो अपने होनहारों को नकल करवाने के लिए स्कूल की खिड़कियों पर चढ़ जाते हैं।

कुमार भवेश | बेगूसराय

रिजल्टविवाद से इंटर साइंस के एक और स्टेट टॉपर अंशुमान मसकरा बेहद खुश हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि इंटरव्यू के बाद इकलौता टॉपर बचूंगा। दरअसल 426 अंक के साथ स्टेट से तीन टॉपर हुए हैं। एक सौरभ विवाद में चुका है। अंशुमान के पिता ने बताया कि सुबह जब मैंने खबर सुनाई कि अब टॉपरों का साक्षात्कार होगा, तो वह चहक उठा। दसवीं में 10 सीजीपीए लाने वाला अंशुमान आईआईटी मेन क्लियर कर चुका है।

मेरी सारी डिग्रियां सही है। यह आरोप वैसे लोग लगा रहे हैं जिन्हें कॉलेज से निकाला जा चुका है। मैं अपनी डिग्रियां दिखाने को भी तैयार हूं। -अमितकुमार, प्रिंसिपल

इंटर में दो बार फेल

बच्चाबाबू ने भगवानपुर के उच्च विद्यालय से 1994 में दसवीं पास की। 1994 में अपने दादा के नाम पर खोले गए काॅलेज में दाखिला लिया। 1996 1997 की इंटर परीक्षा में फेल हो गए। 1998 में तीसरे प्रयास में प्रथम श्रेणी से इंटर विज्ञान की परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्हें 591 अंक मिले।

शिक्षा विभाग बोर्ड के अध्यक्ष डाॅ. लालकेश्वर प्रसाद सिंह सचिव हरिहर नाथ झा को बदल सकता है। मुख्यमंत्री ने इंटर रिजल्ट में गड़बड़ी को काफी गंभीरता से लिया है। उन्होंने शिक्षा मंत्री को तत्काल ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मंत्री डाॅ. अशोक चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री भी इस गड़बड़ी से दुखी हैं। सरकार ने नकल रोकने के लिए प्रयास किया, पर इस गड़बड़ी ने पानी फेर दिया।
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