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वेतन के लिए उपयोगिता प्रमाणपत्र की बाध्यता खत्म

राज्यमें विश्वविद्यालय शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मियों के वेतन भुगतान की बड़ी अड़चन समाप्त हो गई है। सरकार ने उपयोगिता प्रमाणपत्र की बाध्यता के नियम में ढिलाई कर दी है। शुक्रवार को कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब तक विश्वविद्यालयों की स्वीकृत राशि को तभी जारी किया जाता था, जब उपयोगिता प्रमाणपत्र को महालेखाकार द्वारा स्वीकार कर लिया जाए।
नतीजा विश्वविद्यालय शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मियों के वेतन और पेंशन भुगतान में कई-कई माह की देर होती थी। दूसरी ओर कन्या आवासीय प्लस 2 उच्च विद्यालयों में संविदा या नियत मानदेय पर तैनात व्याख्या और शिक्षकों को 7 अगस्त के प्रभाव से 11 माह का एक्सटेंशन दे दिया गया है। राज्य के 38 जिला परिषद, 534 पंचायत समितियों और 8391 ग्राम पंचायतों के बीच सहायक अनुदान देने के लिए 2162 करोड़ रुपए दिए गए हैं। फिलहाल, इसकी पहली किश्त जारी कर दी गई है।

यह होगा लाभ

नियोजितशिक्षकों की सेवा शर्त बनने के बाद इन्हें स्थानांतरण की सुविधा मिलेगी। साथ ही इन्हें प्रोन्नति के लाभ के अलावा अन्य विभागीय सुविधाएं भी मिलेंगी। नियोजित शिक्षकों को वेतनमान देने के साथ सरकार ने इसके लिए सेवा शर्त बनाने का भी भरोसा दिया था। पिछले कई माह से शिक्षक संघ भी लगातार सेवा शर्त बनाने के लिए विभाग से मांग कर रहे हैं।

अन्य फैसले

{ बिहारफुटकर विक्रेता (जीविका संरक्षण और व्यापार विनियमन) अधिनियम 2012 निरस्त

{उत्पाद अधिकारियों को प्रोन्नति

{ विभागाध्यक्ष की मंजूरी से दो लाख रुपए के सामान की हो सकेगी खरीद

{ कृषि बीमा योजना के लिए 450 करोड़ रुपए

{ आवास बोर्ड (आवासीय भू संपदा का प्रबंधन निस्तार) नियमावली में संशोधन

{ भागलपुर स्मार्ट सिटी लि. के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव की बजाए उनके प्रतिनिधि होंगे शामिल

{राज्य स्वास्थ्य मिशन के लिए 195 करोड़ रुपए

बस अड्डे की लागत बढ़ी

राजधानीमें अंतरराज्यीय बस टर्मिनल की परियोजना लागत 110 करोड़ रुपए बढ़ गई है। नए प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। अब इस पर 220 करोड़ रुपए की बजाय 331 करोड़ रुपए खर्च होंगे। हुडको से कर्ज लेकर इस योजना को बुडको के माध्यम से पूरा कराया जाएगा।
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