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सत्यापन ने बढ़ाई नियोजित शिक्षकों की उलझन : बिहार शिक्षक नियोजन Latest Updates

जाटी, सिवान : नियोजित शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन के आदेश ने जिले के अधिकतर शिक्षकों व उनके परिजनों को बेचैन कर रखा है। हड़ताल स्थगन के बाद बचा ग्रीष्मावकाश प्रमाण पत्र की अभिप्रमाणित प्रति जमा करने में समाप्त हो गया। कभी बीआरसी का चक्कर तो कभी सीआरसी का चक्कर लगाते नियोजित शिक्षकों में ऊहापोह भी है तो संशय भी। अधिकतर लोग परेशान दिख रहे हैं। परेशानी की वजह है कि कभी कुछ तो कभी कुछ कागजात जमा करने का फरमान जारी हो रहा है। पहले प्रमाण की अभिप्रमाणित प्रति प्रतिनियुक्त शिक्षक के पास जमा करने को कहा गया। शिक्षकों ने इसे जमा करना शुरू किया तो बताया गया कि दो सेट में जमा करना है। किसी-किसी प्रखंड में तो तीन सेट में स्व अभिप्रमाणित प्रमाण पत्रों की छाया प्रति जमा कराई गई।
फिर नियोजितों से आवेदन के समय दिया गया शपथ पत्र भी सत्यापन के लिए जमा कराया गया। उलझन यही खत्म नहीं हुई, फिर आदेश मिला कि मास्टर डाटा प्रपत्र भर कर जमा करें। नियोजित शिक्षकों का मानना है कि प्रमाण पत्रों के सत्यापन व जांच के नाम पर उन्हें परेशान किया जा रहा है।
कहीं पूरा कहीं काम अधूरा :
सत्यापन के लिए प्रमाण पत्रों को जमा करने का अधिकांश प्रखंडों में कार्य पूरा कर लिया गया है। मैरवा, नौतन, जीरादेई समेत अधिकांश प्रखंडों में सत्यापन के लिए प्रमाण पत्रों को जमा करने का कार्य पूरा कर लिया गया है। लकड़ी नबी गंज में भी प्रमाणपत्र जमा हो गया है। नौतन के बीईओ नागेश्वर कुमार ने बताया कि सभी 333 नियोजित शिक्षकों का प्रमाण पत्र, शपथ पत्र व मास्टर डाटा जमा कर सत्यापन के लिए अग्रेतर कार्रवाई चल रही है। मैरवा बीईओ शम्शी अहमद के अनुसार प्रमाण पत्र जमा करने का कार्य पूरा हो चुका है। गोरेयाकोठी में 750 नियोजित शिक्षक हैं। यहां अभी प्रमाण पत्र जमा करने का कार्य पूरा नहीं हो सका है। गुठनी में 403 शिक्षक हैं। आवेदन पत्र और प्रमाणपत्र जमा करने का काम पांच जून तक चलेगा। जीरादेई में प्रमाण पत्र जमा कर लिया गया है। मैरवा में अभी मास्टर डाटा जमा नहीं हो सका है। हसनपुरा में 442 में महज 66 शिक्षकों ने प्रमाणपत्र जमा कराए हैं। पंचायतों से एक भी प्रमाणपत्र जमा नहीं हुआ है।
नगर शिक्षक ज्यादा परेशान :
प्रमाणपत्र जमा करने के फरमान को लेकर नगर शिक्षक कुछ ज्यादा ही परेशान हैं। इनसे पहल बीआरसी में शपथ पत्र, प्रमाण पत्रों की स्व अभिप्रमाणित छाया प्रति तीन सेट में एवं मास्टर डाटा जमा कराया गया। अब नगर पंचायत ने भी उनसे इसकी मांग की है। इससे उनकी परेशानी बढ़ गई है। कारण यह है कि नगर पंचायत से भी विभाग एवं निगरानी टीम ने नियोजित शिक्षकों के नियोजन अभिलेख व प्रमाण पत्रों की मांग की है। नगर शिक्षकों ने बताया कि जांच के नाम पर यह तो परेशान करने का ही काम है।
सुस्ती के कई निहितार्थ
प्रमाण पत्र जमा करने में जो शिक्षक सुस्त हैं उन्हें विभाग संदेह के घेरे में रख चिह्नित कर रहा है। वहीं शिक्षकों के बीच भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है। सुस्ती के कई मायने लगाए जा रहे हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जिस शिक्षक का प्रमाण पत्र जमा नहीं होगा उसे फर्जी मानते हुए हटाने की कार्रवाई पहले शुरू होगी। यह शिक्षकों को ही नहीं, उनके परिजनों व रिश्तेदारों को भी बेचैन किए हुए है।
त्याग पत्र देने वाले की भी जांच :
शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव ने ऐसे शिक्षकों के नियोजन व प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश दिए हैं जो पूर्व में किसी कारणवश त्याग पत्र दे दिया है या मृत्यु हो चुकी है। इस तरह एक दिन भी नौकरी करने वाले नियोजित शिक्षकों को जांच के दायरे में रखा गया है। इससे नियोजित शिक्षक का पद छोड़ने वालों में भी बेचैनी है। वहीं फर्जी तौर पर अंक बढ़ा कर या जाली प्रमाण पत्रों पर बहाल होने वाले खुद को निगरानी दल के जाल में फंसता मानने लगे हैं।
बिचौलियों के चेहरे हुए पीले :
निगरानी दल के काम करने के तरीके व शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के फरमान के आगे बिचौलिये बौने साबित होने लगे हैं। उन्हें लग रहा है कि इस बार उनकी दाल नहीं गलने वाली है। फर्जी शिक्षकों को तो उन्होंने बहाल करा लिया लेकिन उन्हें नहीं बचा पाएंगे। बिचौलिये को यह भी डर सता रहा है कि फर्जी पकड़े गए तो कहीं वे पूरे खेल का भंडाफोड़ न कर दें।
बीडीओ ने भी दिए निर्देश :
निगरानी टीम से मिले पत्र के आलोक में प्रखंडाधीन सभी नियोजन इकाई के पंचायत सचिव को नियोजन इकाई के पंचायत सचिव को बीडीओ ने निगरानी टीम को पूर्ण सहयोग प्रदान करने एवं मांगे गए सभी अभिलेख निर्देशानुसार मुहैया कराने को कहा है। विदित हो कि निगरानी टीम ने मेधा सूची, नियोजित शिक्षकों के आवेदन पत्र व संलग्न प्रमाण पत्रों की मांग की है।

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